हर बात “खामोशी” से …

हर बात “खामोशी” से मान लेना,
यह भी अन्दाज होता है, नाराजगी का..😎

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हर बात “खामोशी” से मान लेना,
यह भी अन्दाज होता है, नाराजगी का..😎

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“जाने क्यों मेरी …

“जाने क्यों मेरी #नींदों के, हाथ नहीं #पीले होते..

पलकों से लौटी हैं कितने, सपनों की #बारातें, सच…#R3han

“जाने क्यों मेरी #नींदों के, हाथ नहीं #पीले होते..

पलकों से लौटी हैं कितने, सपनों की #बारातें, सच…#R3han

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धड़कनों में बसते …

धड़कनों में बसते हैं आप सब लोग,
ज़ुबान पे नाम लाना जरुरी नहीं होता मेरे दोस्त !!
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SHoaiB

धड़कनों में बसते हैं आप सब लोग,
ज़ुबान पे नाम लाना जरुरी नहीं होता मेरे दोस्त !!
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हमे आती नही प्यार …

हमे आती नही प्यार भरी शायरी दोस्तो

जिसको दर्द सुनना है वो महफ़िल में आ जाये..!

#ऋषि✍

हमे आती नही प्यार भरी शायरी दोस्तो

जिसको दर्द सुनना है वो महफ़िल में आ जाये..!

#ऋषि✍

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आपकी एक चाय, इस शाम …

आपकी एक चाय, इस शाम पर उधार है😊
फ़ुर्सत मिले तो एक हल्की सी हँसी के साथ कभी पिला जाना ☺️
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SHoaiB

आपकी एक चाय, इस शाम पर उधार है😊
फ़ुर्सत मिले तो एक हल्की सी हँसी के साथ कभी पिला जाना ☺️
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हमको अब हसरत नही …

हमको अब हसरत नही रही किसी को पाने की

अब तो बस चाहत है मोहब्बत को भूल जाने की.!

#ऋषि✍

हमको अब हसरत नही रही किसी को पाने की

अब तो बस चाहत है मोहब्बत को भूल जाने की.!

#ऋषि✍

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दोस्त लिखूं, रक़ीब …

दोस्त लिखूं, रक़ीब लिखूं, संगदिल लिखूं या दिलरुबा लिखूं ,,,
सोचता हूँ ख़त में तुम्हें क्या लिखूं ।।

किस्मत लिखूं, ज़िन्दगी लिखूं, खुशनसीबी लिखूं या सज़ा लिखूं ,,,
सोचता हूँ ख़त में तुम्हें क्या लिखूं ।।

आरज़ू लिखू, जुस्तजू लिखूं, वजह लिखूं या ऐवें ही सब बेवजह लिखूं ,,,
सोचता हूँ ख़त में तुम्हें क्या लिखूं ।।

मोहब्बत लिखूं, नाराज़गी लिखूं, वफ़ा लिखूं या बेवफा लिखूं …
सोचता हूँ ख़त में तुम्हें क्या लिखूं ।।
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SHoaiB

दोस्त लिखूं, रक़ीब लिखूं, संगदिल लिखूं या दिलरुबा लिखूं ,,,
सोचता हूँ ख़त में तुम्हें क्या लिखूं ।।

किस्मत लिखूं, ज़िन्दगी लिखूं, खुशनसीबी लिखूं या सज़ा लिखूं ,,,
सोचता हूँ ख़त में तुम्हें क्या लिखूं ।।

आरज़ू लिखू, जुस्तजू लिखूं, वजह लिखूं या ऐवें ही सब बेवजह लिखूं ,,,
सोचता हूँ ख़त में तुम्हें क्या लिखूं ।।

मोहब्बत लिखूं, नाराज़गी लिखूं, वफ़ा लिखूं या बेवफा लिखूं …
सोचता हूँ ख़त में तुम्हें क्या लिखूं ।।
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SHoaiB

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किसी भी रिश्ते की …

किसी भी रिश्ते की मियाद होती है बस,
वक़्त चुरा कर मिलने से, वक़्त मिले तो मिलने तक!
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SHoaiB

किसी भी रिश्ते की मियाद होती है बस,
वक़्त चुरा कर मिलने से, वक़्त मिले तो मिलने तक!
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बनावटी रिश्तों से …

बनावटी रिश्तों से ज्यादा सुकून देता है।

अकेलापन…..

बनावटी रिश्तों से ज्यादा सुकून देता है।

अकेलापन…..

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सुनो…. …

सुनो….
क्यों न मैं ऐनक लगाऊं और तुम अखबार हो जाओ
क्यों न मैं फूरसत मे आऊं और तुम रविवार हो जाओ।
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SHoaiB

सुनो….
क्यों न मैं ऐनक लगाऊं और तुम अखबार हो जाओ
क्यों न मैं फूरसत मे आऊं और तुम रविवार हो जाओ।
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SHoaiB

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