Kabhi kisi ko mukkamal jaha nahi milta

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीं तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता

जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है
ज़ुबाँ मिली है मगर हमज़ुबा नहीं मिलता

बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले
ये ऐसी आग है जिस में धुआँ नहीं मिलता

तेरे जहान में ऐसा नहीं कि प्यार न हो
जहाँ उम्मीद हो इस की वहाँ नहीं मिलता

Nida fazli

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Kabhi kisi ko mukkamal jaha nahi milta

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीं तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता

जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है
ज़ुबाँ मिली है मगर हमज़ुबा नहीं मिलता

बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले
ये ऐसी आग है जिस में धुआँ नहीं मिलता

तेरे जहान में ऐसा नहीं कि प्यार न हो
जहाँ उम्मीद हो इस की वहाँ नहीं मिलता

Nida fazli

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Gali

यूं उठे आह उस गली से हम
जैसे कोई जहाँ से उठता है

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Kagaz

मेरे रोने की हकीकत जिस में थी
एक मुद्दत तक वो क़ाग़ज़ नम रहा

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Gham

ग़म रहा जब तक कि दम में दम रहा
दिल के जाने का निहायत ग़म रहा 

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Aankhe

‘मीर’ उन नीमबाज़ आँखों में,
सारी मस्ती शराब की सी है ।

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Lub

नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए,
हर एक पंखुड़ी गुलाब की सी है । 

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Afsaana

मुहब्बत में मेरी बर्बादी का भी बड़ा अजीब अफसाना था….
दिल के टुकडे-टुकड़े हो गये और लोगों ने कहा वाह क्या निशाना था

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