Asool

उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी है
जो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है

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Jannat

बाद मरने के मिली जन्नत ख़ुदा का शुक्र है 
मुझको दफ़नाया रफ़ीक़ों ने गली में यार की 

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Yaad

कभी उनकी याद आती है कभी उनके ख्व़ाब आते हैं..
मुझे सताने के सलीके तो उन्हें बेहिसाब आते हैं…!!

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Mulakaat

चन्द लम्हों के लिए एक मुलाक़ात रही,
फिर ना वो तू, ना वो मैं, ना वो रात रही।

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Dooriyan

दूरियाँ जब बढी तो गलतफमियाँ भी बढ गयी
फिर तुमने वो भी सुना , जो मैंने कहा ही नही

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Nigah

सोचा था नही करेगे कभी किसी से मोहब्बत…
पर तुम्हारी उन निगाहो ने…
मेरे दिल को ही मेरे खिलाफ कर दिया…

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Khat

इक ख़त कमीज़ में उसके नाम का क्या रखा,
क़रीब से गुज़रा हर शख्स पूछता है कौन सा इत्र है जनाब।।

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agar ham kahen aur wo muskura de

अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें 
हम उनके लिए ज़िंदगानी लुटा दें 

हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें 
चलो ज़िन्दगी को मोहब्बत बना दें 

अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूले 
कि चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें 

कभी ग़म की आँधी, जिन्हें छू न पाये 
वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें 

क़यामत के दीवाने कहते हैं हमसे 
चलो उनके चहरे से पर्दा हटा दें 

सज़ा दें, सिला दें, बना दें, मिटा दें 
मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें
Sudarshan faakir

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Aaj ke daur me e dost

आज के दौर में ऐ दोस्त ये मंज़र क्यूँ है 
ज़ख़्म हर सर पे हर इक हाथ में पत्थर क्यूँ है 

जब हक़ीक़त है के हर ज़र्रे में तू रहता है 
फिर ज़मीं पर कहीं मस्जिद कहीं मंदिर क्यूँ है 

अपना अंजाम तो मालूम है सब को फिर भी 
अपनी नज़रों में हर इन्सान सिकंदर क्यूँ है

ज़िन्दगी जीने के क़ाबिल ही नहीं अब “फ़ाकिर” 
वर्ना हर आँख में अश्कों का समंदर क्यूँ है

Sudarshan faakir

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