Muhabbat

जब हम दिल को समझाने लगते है
कि वो हमे कभी नही मिल सकते..
ना जाने क्यों
तब मोहब्बत और ज्यादा होने लगती है..

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Yaad

रख लो दिल में संभाल कर थोड़ी सी याद मेरी….
रह जाओगे जब तन्हा, तो काम आएंगे हम…

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Izhaar

अच्छा करते हैं वो लोग जो मोहब्बत का इज़हार नहीं करते,
ख़ामोशी से मर जाते हैं मगर किसी को बदनाम नहीं करते…

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Apne tadapne ki mai tadbir pehle kar lu

अपने तड़पने की मैं तदबीर पहले कर लूँ
तब फ़िक्र मैं करूँगा ज़ख़्मों को भी रफू का।

यह ऐश के नहीं हैं या रंग और कुछ है
हर गुल है इस चमन में साग़र भरा लहू का।

बुलबुल ग़ज़ल सराई आगे हमारे मत कर
सब हमसे सीखते हैं, अंदाज़ गुफ़्तगू का।

-Mir Taqi Mir

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Bekhudi le gayi kahan hum ko

बेखुदी ले गयी कहाँ हम को
देर से इंतज़ार है अपना

रोते फिरते हैं सारी-सारी रात
अब यही रोज़गार है अपना

दे के दिल हम जो हो गए मजबूर
इस में क्या इख्तियार है अपना

कुछ नही हम मिसाले-अनका लेक
शहर-शहर इश्तेहार है अपना

जिस को तुम आसमान कहते हो
सो दिलों का गुबार है अपना

-Mir Taqi Mir

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Kaha maine kitna hai gul ka sabaat

कहा मैंने कितना है गुल का सबात
कली ने यह सुनकर तब्बसुम किया

जिगर ही में एक क़तरा खूं है सरकश
पलक तक गया तो तलातुम किया

किसू वक्त पाते नहीं घर उसे
बहुत ‘मीर’ ने आप को गम किया

-Mir Taqi Mir

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Qatl

रोज करते है कत्ल… अपने ख्वाबो का…,
हकीकत में जीना इतना आसान नहीं होता.!!

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Raat

रात पूरी जाग कर गुजार दूँ तेरी खातिर
एक बार कह कर तो देख,
कि मुझे भी तेरे बगैर,
नींद नही आती !!!

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