Zindgi

ज़िन्दगी! तू कोई दरिया है कि सागर है कोई,
मुझको मालूम तो हो कौन से पानी में हूँ मैं ।

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Zindgi

ज़िन्दगी वो जो ख़्वाबों-ख़्यालों में है, वो तो शायद मयस्सर न होगी कभी,
ये जो लिक्खी हुई इन लकीरों में है, अब इसी ज़िन्दगानी के हो जाएँ क्या ।

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Zindgi

कभी मुझ को साथ लेकर, कभी मेरे साथ चल के;
वो बदल गए अचानक, मेरी ज़िन्दगी बदल के

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Aansu

जरा सी बात देर तक रुलाती रही,
खुशी में भी आँखे आँसू बहाती रही,
कोइ मिल के खो गया तो कोइ खो के मिल गया
जिन्दगी हमको बस ऐसे ही आजमाती रही

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Muskurahat

तू रूठी रूठी सी लगती है, कोई तरकीब बता मनाने की
मैं ज़िन्दगी गिरवी रख दूं, तू क़ीमत तो बता मुस्कुराने की

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