Tasveer

पलकों पे लरजते अश्कों में तसवीर झलकती है तेरी. 
दीदार की प्यासी आँखों को, अब प्यास नहीं और प्यास भी है.

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Pyas

तू किसी और के लिए होगा समन्दर-ए-इश्क़ फ़राज़
हम तो रोज़ तेरे साहिल से प्यासे गुज़र जाते हैं

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