ऐसे तो उससे …

ऐसे तो उससे मोहब्बत में कमी होती है,
माँ का एक दिन नहीं होता है सदी होती है !

#MunawwarRana #MothersDay

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ऐसे तो उससे मोहब्बत में कमी होती है,
माँ का एक दिन नहीं होता है सदी होती है !

#MunawwarRana #MothersDay

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अभी ज़िंदा है माँ …

अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा
मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है
#MunawwarRana #MothersDay

अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा
मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है
#MunawwarRana #MothersDay

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चलती फिरती आँखों …

चलती फिरती आँखों से अज़ाँ देखी है
मैंने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है l
#MunawwarRana #MothersDay

चलती फिरती आँखों से अज़ाँ देखी है
मैंने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है l
#MunawwarRana #MothersDay

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लबों पे उसके कभी …

लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती..
बस एक “माँ ” है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती !

#MunawwarRana #MothersDay

लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती..
बस एक “माँ ” है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती !

#MunawwarRana #MothersDay

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…….माँ बहुत झूठ बोलती है…….

सुबह जल्दी जगाने को,
सात बजे को आठ कहती है।
नहा लो, नहा लो, के घर में नारे बुलंद करती है।
मेरी खराब तबियत का दोष बुरी नज़र पर मढ़ती है।
छोटी छोटी परेशानियों पर बड़ा बवंडर करती है।

……माँ बहुत झूठ बोलती है……

थाल भर खिलाकर,

तेरी भूख मर गयी कहती है।

जो मैं न रहूँ घर पे तो,

मेरी पसंद की कोई चीज़ रसोई में उससे नहीं पकती है।

मेरे मोटापे को भी,

कमजोरी की सूजन बोलती है।

……माँ बहुत झूठ बोलती है……

दो ही रोटी रखी है रास्ते के लिए, बोल कर,

मेरे साथ दस लोगों का खाना रख देती है।

कुछ नहीं-कुछ नहीं बोल,

नजर बचा बैग में,

छिपी शीशी अचार की बाद में निकलती है।

……माँ बहुत झूठ बोलती है……

टोका टाकी से जो मैं झुँझला जाऊँ कभी तो,

समझदार हो, अब न कुछ बोलूँगी मैं,

ऐंसा अक्सर बोलकर वो रूठती है।

अगले ही पल फिर चिंता में हिदायती हो जाती है।

……माँ बहुत झूठ बोलती है……

तीन घंटे मैं थियटर में ना बैठ पाऊँगी,

सारी फ़िल्में तो टी वी पे आ जाती हैं,

बाहर का तेल मसाला तबियत खराब करता है,

बहानों से अपने पर होने वाले खर्च टालती है।

……माँ बहुत झूठ बोलती है……

मेरी उपलब्धियों को बढ़ा चढ़ा कर बताती है।

सारी खामियों को सब से छिपा लिया करती है।

उसके व्रत, नारियल, धागे, फेरे, सब मेरे नाम,

तारीफ़ ज़माने में कर बहुत शर्मिंदा करती है।

……माँ बहुत झूठ बोलती है……

भूल भी जाऊँ दुनिया भर के कामों में उलझ,

उसकी दुनिया में वो मुझे कब भूलती है।

मुझ सा सुंदर उसे दुनिया में ना कोई दिखे,

मेरी चिंता में अपने सुख भी किनारे कर देती है।

……माँ बहुत झूठ बोलती है……

उसके फैलाए सामानों में से जो एक उठा लूँ

खुश होती जैसे, खुद पर उपकार समझती है।

मेरी छोटी सी नाकामयाबी पे उदास होकर,

सोच सोच अपनी तबियत खराब करती है।
……माँ बहुत झूठ बोलती है……

🙏हर माँ को समर्पित🙏
#MothersDay

…….माँ बहुत झूठ बोलती है…….

सुबह जल्दी जगाने को,
सात बजे को आठ कहती है।
नहा लो, नहा लो, के घर में नारे बुलंद करती है।
मेरी खराब तबियत का दोष बुरी नज़र पर मढ़ती है।
छोटी छोटी परेशानियों पर बड़ा बवंडर करती है।

……माँ बहुत झूठ बोलती है……

थाल भर खिलाकर,

तेरी भूख मर गयी कहती है।

जो मैं न रहूँ घर पे तो,

मेरी पसंद की कोई चीज़ रसोई में उससे नहीं पकती है।

मेरे मोटापे को भी,

कमजोरी की सूजन बोलती है।

……माँ बहुत झूठ बोलती है……

दो ही रोटी रखी है रास्ते के लिए, बोल कर,

मेरे साथ दस लोगों का खाना रख देती है।

कुछ नहीं-कुछ नहीं बोल,

नजर बचा बैग में,

छिपी शीशी अचार की बाद में निकलती है।

……माँ बहुत झूठ बोलती है……

टोका टाकी से जो मैं झुँझला जाऊँ कभी तो,

समझदार हो, अब न कुछ बोलूँगी मैं,

ऐंसा अक्सर बोलकर वो रूठती है।

अगले ही पल फिर चिंता में हिदायती हो जाती है।

……माँ बहुत झूठ बोलती है……

तीन घंटे मैं थियटर में ना बैठ पाऊँगी,

सारी फ़िल्में तो टी वी पे आ जाती हैं,

बाहर का तेल मसाला तबियत खराब करता है,

बहानों से अपने पर होने वाले खर्च टालती है।

……माँ बहुत झूठ बोलती है……

मेरी उपलब्धियों को बढ़ा चढ़ा कर बताती है।

सारी खामियों को सब से छिपा लिया करती है।

उसके व्रत, नारियल, धागे, फेरे, सब मेरे नाम,

तारीफ़ ज़माने में कर बहुत शर्मिंदा करती है।

……माँ बहुत झूठ बोलती है……

भूल भी जाऊँ दुनिया भर के कामों में उलझ,

उसकी दुनिया में वो मुझे कब भूलती है।

मुझ सा सुंदर उसे दुनिया में ना कोई दिखे,

मेरी चिंता में अपने सुख भी किनारे कर देती है।

……माँ बहुत झूठ बोलती है……

उसके फैलाए सामानों में से जो एक उठा लूँ

खुश होती जैसे, खुद पर उपकार समझती है।

मेरी छोटी सी नाकामयाबी पे उदास होकर,

सोच सोच अपनी तबियत खराब करती है।
……माँ बहुत झूठ बोलती है……

🙏हर माँ को समर्पित🙏
#MothersDay

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मुझे कढ़े हुए …

मुझे कढ़े हुए तकिये की क्या ज़रूरत है
किसी का हाथ अभी मेरे सर के नीचे है

#मुनव्वर_राणा #MothersDay

मुझे कढ़े हुए तकिये की क्या ज़रूरत है
किसी का हाथ अभी मेरे सर के नीचे है

#मुनव्वर_राणा #MothersDay

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बुज़ुर्गों का मेरे …

बुज़ुर्गों का मेरे दिल से अभी तक डर नहीं जाता
कि जब तक जागती रहती है माँ मैं घर नहीं जाता

#मुनव्वर_राणा #MothersDay

बुज़ुर्गों का मेरे दिल से अभी तक डर नहीं जाता
कि जब तक जागती रहती है माँ मैं घर नहीं जाता

#मुनव्वर_राणा #MothersDay

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कुछ नहीं होगा तो …

कुछ नहीं होगा तो आँचल में छुपा लेगी मुझे
माँ कभी सर पे खुली छत नहीं रहने देगी

#मुनव्वर_राणा #MothersDay

कुछ नहीं होगा तो आँचल में छुपा लेगी मुझे
माँ कभी सर पे खुली छत नहीं रहने देगी

#मुनव्वर_राणा #MothersDay

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अभी ज़िन्दा है माँ …

अभी ज़िन्दा है माँ मेरी मुझे कु्छ भी नहीं होगा
मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है

#मुनव्वर_राणा #MothersDay

अभी ज़िन्दा है माँ मेरी मुझे कु्छ भी नहीं होगा
मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है

#मुनव्वर_राणा #MothersDay

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मेरी ख़्वाहिश है …

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँ
माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ

#मुनव्वर_राणा #MothersDay

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँ
माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ

#मुनव्वर_राणा #MothersDay

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