Gulab

J

सोच रहा हूँ मर ही जाऊ आज…

शायद कब्र पर ही कोई गुलाब ले आये…!

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Lub

नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए,
हर एक पंखुड़ी गुलाब की सी है । 

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