आज साक़ी शराब रहने दो

आज साक़ी शराब रहने दो
तिश्नगी के अजाब रहने दो

पोंछ डालो ना आँख से काजल
कुछ तो ख़ंजर पे आब रहने दो

तुम सँवारो अपनी इन ज़ुल्फ़ों को
मेरी हालत ख़राब रहने दो

चाँद बादल में अच्छा लगता है
आधे रूख पे नक़ाब रहने दो

उनके चेहरे की बात हो जाए
आज ज़िक्र-ए-गुलाब रहने दो

उन की चौखट को चूम लो ‘मोहसिंन’
बाक़ी सारे सवाब रहने दो
          
– मोहसिन नक़वी

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Chand

रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं 
चाँद पागल हैं अंधेरे में निकल पड़ता हैं 

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Chamkile shishe

आप की खा़तिर अगर हम लूट भी लें आसमाँ
क्या मिलेगा चंद चमकीले से शीशे तोड़ के!

चाँद चुभ जायेगा उंगली में तो खू़न आ जायेगा
#gulzar  #गुलज़ार  #त्रिवेणी

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