#जौन_एलिया …

#जौन_एलिया

सारे रिश्ते तबाह कर आया
दिल-ए-बर्बाद अपने घर आया
आख़िरश ख़ून थूकने से मियाँ
बात में तेरी क्या असर आया
था ख़बर में ज़ियाँ दिल ओ जाँ का
हर तरफ़ से मैं बे-ख़बर आया
अब यहाँ होश में कभी अपने
नहीं आऊँगा मैं अगर आया
मैं रहा उम्र भर जुदा ख़ुद से
याद मैं ख़ुद को उम्र भर आया
वो जो दिल नाम का था एक नफ़र
आज मैं इस से भी मुकर आया
मुद्दतों बाद घर गया था मैं
जाते ही मैं वहाँ से डर आया

Admin #brij

#जौन_एलिया

सारे रिश्ते तबाह कर आया
दिल-ए-बर्बाद अपने घर आया
आख़िरश ख़ून थूकने से मियाँ
बात में तेरी क्या असर आया
था ख़बर में ज़ियाँ दिल ओ जाँ का
हर तरफ़ से मैं बे-ख़बर आया
अब यहाँ होश में कभी अपने
नहीं आऊँगा मैं अगर आया
मैं रहा उम्र भर जुदा ख़ुद से
याद मैं ख़ुद को उम्र भर आया
वो जो दिल नाम का था एक नफ़र
आज मैं इस से भी मुकर आया
मुद्दतों बाद घर गया था मैं
जाते ही मैं वहाँ से डर आया

Admin #brij

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#शरीफ_अमीन …

#शरीफ_अमीन

इस तरह ज़ालिम सताता है मुझे
ज़ुल्म ढाकर गुदगुदाता है मुझे

वो ग़ज़ल मेरी मैं उसका गीत हूँ
मैं उसे वो गुनगुनाता है मुझे

दोस्ती का कुछ भरम तो रख ज़रा
यार होकर आज़माता है मुझे

याद आती हैं तेरी तब थपकियाँ
जब कोई ग़म तोड़ जाता है मुझे

लौटता हूँ ज़ख्म इक ताज़ा लिए
पास वो जब भी बुलाता है मुझे

दिन में रहता है अना की क़ैद में
ख्वाब में फिर क्यूँ सताता है मुझे

रौशनी की क्या ज़रूरत है अमीन
रास्ता तो रब दिखाता है मुझे

Admin #brij

#शरीफ_अमीन

इस तरह ज़ालिम सताता है मुझे
ज़ुल्म ढाकर गुदगुदाता है मुझे

वो ग़ज़ल मेरी मैं उसका गीत हूँ
मैं उसे वो गुनगुनाता है मुझे

दोस्ती का कुछ भरम तो रख ज़रा
यार होकर आज़माता है मुझे

याद आती हैं तेरी तब थपकियाँ
जब कोई ग़म तोड़ जाता है मुझे

लौटता हूँ ज़ख्म इक ताज़ा लिए
पास वो जब भी बुलाता है मुझे

दिन में रहता है अना की क़ैद में
ख्वाब में फिर क्यूँ सताता है मुझे

रौशनी की क्या ज़रूरत है अमीन
रास्ता तो रब दिखाता है मुझे

Admin #brij

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#JaunElia …

#JaunElia

ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं
शुक्रिया मश्वरत का चलते हैं
हो रहा हूँ मैं किस तरह बरबाद
देखने वाले हाथ मलते हैं
है वो जान अब हर एक महफ़िल की
हम भी अब घर से कम निकलते हैं
क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में
जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं
है उसे दूर का सफ़र दर-पेश
हम सँभाले नहीं सँभलते हैं
तुम बनो रंग तुम बनो ख़ुश्बू
हम तो अपने सुख़न में ढलते हैं
मैं उसी तरह तो बहलता हूँ
और सब जिस तरह बहलते हैं
है अजब फ़ैसले का सहरा भी
चल न पड़िए तो पाँव जलते हैं

Admin #brij

#JaunElia

ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं
शुक्रिया मश्वरत का चलते हैं
हो रहा हूँ मैं किस तरह बरबाद
देखने वाले हाथ मलते हैं
है वो जान अब हर एक महफ़िल की
हम भी अब घर से कम निकलते हैं
क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में
जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं
है उसे दूर का सफ़र दर-पेश
हम सँभाले नहीं सँभलते हैं
तुम बनो रंग तुम बनो ख़ुश्बू
हम तो अपने सुख़न में ढलते हैं
मैं उसी तरह तो बहलता हूँ
और सब जिस तरह बहलते हैं
है अजब फ़ैसले का सहरा भी
चल न पड़िए तो पाँव जलते हैं

Admin #brij

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#Nazeer_Baqri …

#Nazeer_Baqri

धुंआ बनाके फ़िज़ा में उड़ा दिया मुझको,
मैं जल रहा था किसी ने बुझा दिया मुझको।

खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए,
सवाल ये है किताबो ने क्या दिया मुझको।

सफेद रंग की चादर लपेट कर मुझ पर,
फसीने शहर में किसने सजा दिया मुझको।

मैं एक ज़र्रा बुलंदी को छूने निकला था,
हवा ने थम के ज़मीन पर गिरा दिया मुझको।

धुंआ बनाके फ़िज़ा में उड़ा दिया मुझको,
मैं जल रहा था किसी ने बुझा दिया मुझको।

Admin #brij

#Nazeer_Baqri

धुंआ बनाके फ़िज़ा में उड़ा दिया मुझको,
मैं जल रहा था किसी ने बुझा दिया मुझको।

खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए,
सवाल ये है किताबो ने क्या दिया मुझको।

सफेद रंग की चादर लपेट कर मुझ पर,
फसीने शहर में किसने सजा दिया मुझको।

मैं एक ज़र्रा बुलंदी को छूने निकला था,
हवा ने थम के ज़मीन पर गिरा दिया मुझको।

धुंआ बनाके फ़िज़ा में उड़ा दिया मुझको,
मैं जल रहा था किसी ने बुझा दिया मुझको।

Admin #brij

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#MirTaqiMir …

#MirTaqiMir
ज़ख्म झेले दाग़ भी खाए बोहत
दिल लगा कर हम तो पछताए बोहत

दैर से सू-ए-हरम आया न टुक
हम मिजाज अपना इधर लाये बोहत

फूल, गुल, शम्स-ओ-क़मर सारे ही थे
पर हमें उनमें तुम ही भाये बोहत

रोवेंगे सोने को हमसाये बोहत

मीर से पूछा जो मैं आशिक हो तुम
हो के कुछ चुपके से शरमाये बोहत

Admin #brij

#MirTaqiMir
ज़ख्म झेले दाग़ भी खाए बोहत
दिल लगा कर हम तो पछताए बोहत

दैर से सू-ए-हरम आया न टुक
हम मिजाज अपना इधर लाये बोहत

फूल, गुल, शम्स-ओ-क़मर सारे ही थे
पर हमें उनमें तुम ही भाये बोहत

रोवेंगे सोने को हमसाये बोहत

मीर से पूछा जो मैं आशिक हो तुम
हो के कुछ चुपके से शरमाये बोहत

Admin #brij

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अजीब तरह से दोनों …

अजीब तरह से दोनों इश्क में नाकाम हुये,

वो मुझे चाह ना सकी और मैं उसको भुला ना सका !!

#brij

अजीब तरह से दोनों इश्क में नाकाम हुये,

वो मुझे चाह ना सकी और मैं उसको भुला ना सका !!

#brij

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दिल तो तोड़ ही दिया …

दिल तो तोड़ ही दिया है,
अब जला दो अशियाना मेरा,
ताकि हम जलकर खाक हो जाये,
ना देख सकें गैरो के संग मुस्कुराना तेरा।

#brij

दिल तो तोड़ ही दिया है,
अब जला दो अशियाना मेरा,
ताकि हम जलकर खाक हो जाये,
ना देख सकें गैरो के संग मुस्कुराना तेरा।

#brij

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#अन्जुम_रहबर …

#अन्जुम_रहबर

जिनके आँगन में अमीरी का शजर लगता है,
उनका हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है

चाँद तारे मेरे क़दमों में बिछे जाते हैं,
ये बुजुर्गों की दुआओं का असर लगता है

माँ मुझे देख के नाराज़ न हो जाए कहीं
सर पे आँचल नही होता है तो डर लगता है !

Admin #brij

#अन्जुम_रहबर

जिनके आँगन में अमीरी का शजर लगता है,
उनका हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है

चाँद तारे मेरे क़दमों में बिछे जाते हैं,
ये बुजुर्गों की दुआओं का असर लगता है

माँ मुझे देख के नाराज़ न हो जाए कहीं
सर पे आँचल नही होता है तो डर लगता है !

Admin #brij

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#unknown …

#unknown

कमाने जब निकलता हूँ पसीना छूट जाता है
मैं इस शिद्दत से मरता हूँ कि जीना छूट जाता है

सफ़्हे कुछ बीच में कोरे से रह जाते हैं अब मुझसे
मैं जब भी साल लिखता हूँ महीना छूट जाता है

जलाऊँ किस तरह चूल्हा और ईमान भी रक्खूँ
मैं गर रोटी पकड़ता हूँ मदीना छूट जाता है

मुझे अब खौफ रहता मैं जब भी घर पहुँचता हूँ
मैं अपनी माँ का मुँह देखूँ तो पीना छूट जाता है

मुझे रहने दे साहिल पर कहीं अब और न ले जा
सुना है दूर जाने पर सफीना छूट जाता है

Admin #brij

#unknown

कमाने जब निकलता हूँ पसीना छूट जाता है
मैं इस शिद्दत से मरता हूँ कि जीना छूट जाता है

सफ़्हे कुछ बीच में कोरे से रह जाते हैं अब मुझसे
मैं जब भी साल लिखता हूँ महीना छूट जाता है

जलाऊँ किस तरह चूल्हा और ईमान भी रक्खूँ
मैं गर रोटी पकड़ता हूँ मदीना छूट जाता है

मुझे अब खौफ रहता मैं जब भी घर पहुँचता हूँ
मैं अपनी माँ का मुँह देखूँ तो पीना छूट जाता है

मुझे रहने दे साहिल पर कहीं अब और न ले जा
सुना है दूर जाने पर सफीना छूट जाता है

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हुज़ूर आपका भी …

हुज़ूर आपका भी एहतराम करता चलूँ
इधर से गुज़रा था सोचा सलाम करता चलूँ,

निगाह-ओ-दिल की यही आखरी तमन्ना है
तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में शाम करता चलूँ,

उन्हें ये ज़िद कि मुझे देख कर किसी को न देख
मेरा ये शौक के सबसे कलाम करता चलूँ !

Admin #brij

हुज़ूर आपका भी एहतराम करता चलूँ
इधर से गुज़रा था सोचा सलाम करता चलूँ,

निगाह-ओ-दिल की यही आखरी तमन्ना है
तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में शाम करता चलूँ,

उन्हें ये ज़िद कि मुझे देख कर किसी को न देख
मेरा ये शौक के सबसे कलाम करता चलूँ !

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