काग़ज के फूल भी …

काग़ज के फूल भी महकते हैं,
कोई देता है जब मोहब्बत से…!!
#brij

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काग़ज के फूल भी महकते हैं,
कोई देता है जब मोहब्बत से…!!
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हल्की हल्की सी …

हल्की हल्की सी सर्द हवा
ज़रा ज़रा सा दर्द-ए-दिल …
अंदाज़ अच्छा है
नवंबर तेरे आने का
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हल्की हल्की सी सर्द हवा
ज़रा ज़रा सा दर्द-ए-दिल …
अंदाज़ अच्छा है
नवंबर तेरे आने का
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क्या हुआ ग़र ख़ुशी …

क्या हुआ ग़र ख़ुशी नहीं बस में
मुस्कुराना तो इख़्तियार में है
#brij

क्या हुआ ग़र ख़ुशी नहीं बस में
मुस्कुराना तो इख़्तियार में है
#brij

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लिखकर गज़ल हमने …

लिखकर गज़ल हमने मोहब्बत का इजहार किया,
वो इतने नादान थे कि हँसकर बोले, एक ओर फरमाईये
#brij
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लिखकर गज़ल हमने मोहब्बत का इजहार किया,
वो इतने नादान थे कि हँसकर बोले, एक ओर फरमाईये
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नज़रअंदाज करने वाले …

नज़रअंदाज करने वाले तेरी कोई खता ही नहीं
मुहब्बत किसको कहते है शायद तुझे पता ही नहीं
Admin #brij
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नज़रअंदाज करने वाले तेरी कोई खता ही नहीं
मुहब्बत किसको कहते है शायद तुझे पता ही नहीं
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मुझे जो मेरे लहू …

मुझे जो मेरे लहू में डुबो के निकला है
वो कोई गैर नहीं यार इक पुराना था
Admin #brij
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मुझे जो मेरे लहू में डुबो के निकला है
वो कोई गैर नहीं यार इक पुराना था
Admin #brij
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Bachpan wali diwali …

Bachpan wali diwali

हफ्तों पहले से साफ़-सफाई में जुट जाते हैं
चूने के कनिस्तर में थोड़ी नील मिलाते हैं
अलमारी खिसका खोयी चीज़ वापस पाते हैं
दोछत्ती का कबाड़ बेच कुछ पैसे कमाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ….

दौड़-भाग के घर का हर सामान लाते हैं
चवन्नी -अठन्नी पटाखों के लिए बचाते हैं
सजी बाज़ार की रौनक देखने जाते हैं
सिर्फ दाम पूछने के लिए चीजों को उठाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ….

बिजली की झालर छत से लटकाते हैं
कुछ में मास्टर बल्ब भी लगाते हैं
टेस्टर लिए पूरे इलेक्ट्रीशियन बन जाते हैं
दो-चार बिजली के झटके भी खाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ….

दूर थोक की दुकान से पटाखे लाते है
मुर्गा ब्रांड हर पैकेट में खोजते जाते है
दो दिन तक उन्हें छत की धूप में सुखाते हैं
बार-बार बस गिनते जाते है
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ….

धनतेरस के दिन कटोरदान लाते है
छत के जंगले से कंडील लटकाते हैं
मिठाई के ऊपर लगे काजू-बादाम खाते हैं
प्रसाद की थाली पड़ोस में देने जाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ….

माँ से खील में से धान बिनवाते हैं
खांड के खिलोने के साथ उसे जमके खाते है
अन्नकूट के लिए सब्जियों का ढेर लगाते है
भैया-दूज के दिन दीदी से आशीर्वाद पाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ….

दिवाली बीत जाने पे दुखी हो जाते हैं
कुछ न फूटे पटाखों का बारूद जलाते हैं
घर की छत पे दगे हुए राकेट पाते हैं
बुझे दीयों को मुंडेर से हटाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ….

बूढ़े माँ-बाप का एकाकीपन मिटाते हैं
वहीँ पुरानी रौनक फिर से लाते हैं
सामान से नहीं ,समय देकर सम्मान जताते हैं
उनके पुराने सुने किस्से फिर से सुनते जाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ….
Admin #brij

Bachpan wali diwali

हफ्तों पहले से साफ़-सफाई में जुट जाते हैं
चूने के कनिस्तर में थोड़ी नील मिलाते हैं
अलमारी खिसका खोयी चीज़ वापस पाते हैं
दोछत्ती का कबाड़ बेच कुछ पैसे कमाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ….

दौड़-भाग के घर का हर सामान लाते हैं
चवन्नी -अठन्नी पटाखों के लिए बचाते हैं
सजी बाज़ार की रौनक देखने जाते हैं
सिर्फ दाम पूछने के लिए चीजों को उठाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ….

बिजली की झालर छत से लटकाते हैं
कुछ में मास्टर बल्ब भी लगाते हैं
टेस्टर लिए पूरे इलेक्ट्रीशियन बन जाते हैं
दो-चार बिजली के झटके भी खाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ….

दूर थोक की दुकान से पटाखे लाते है
मुर्गा ब्रांड हर पैकेट में खोजते जाते है
दो दिन तक उन्हें छत की धूप में सुखाते हैं
बार-बार बस गिनते जाते है
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ….

धनतेरस के दिन कटोरदान लाते है
छत के जंगले से कंडील लटकाते हैं
मिठाई के ऊपर लगे काजू-बादाम खाते हैं
प्रसाद की थाली पड़ोस में देने जाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ….

माँ से खील में से धान बिनवाते हैं
खांड के खिलोने के साथ उसे जमके खाते है
अन्नकूट के लिए सब्जियों का ढेर लगाते है
भैया-दूज के दिन दीदी से आशीर्वाद पाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ….

दिवाली बीत जाने पे दुखी हो जाते हैं
कुछ न फूटे पटाखों का बारूद जलाते हैं
घर की छत पे दगे हुए राकेट पाते हैं
बुझे दीयों को मुंडेर से हटाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ….

बूढ़े माँ-बाप का एकाकीपन मिटाते हैं
वहीँ पुरानी रौनक फिर से लाते हैं
सामान से नहीं ,समय देकर सम्मान जताते हैं
उनके पुराने सुने किस्से फिर से सुनते जाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं ….
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लाख पता बदला मगर वो …

लाख पता बदला मगर वो पहुँच ही गया
गम भी था कोई ‘डाकिया’ जिद्दी सा…..
#brij

लाख पता बदला मगर वो पहुँच ही गया
गम भी था कोई ‘डाकिया’ जिद्दी सा…..
#brij

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ये भी इक हादसा है …

ये भी इक हादसा है मेरी जिन्दगी के साथ
मैं हूँ किसी के साथ, मेरा दिल किसी के साथ
#brij

ये भी इक हादसा है मेरी जिन्दगी के साथ
मैं हूँ किसी के साथ, मेरा दिल किसी के साथ
#brij

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