इक पल में सदी का …

इक पल में सदी का मजा हम से पूछिए
दो दिन में जिंदगी का मजा हम से पूछिए

भूलें हैं रफ्ता रफ्ता उन्हें मुद्दतों में हम
किस्तों में खुद – कुशी का मजा हम से पूछिए

आगाज – ए – आशिकी का मजा आप जानिए
अंजाम – ए – आशिकी का मजा हम से पूछिए

जलते दीयों में जलते घरों जैसी लौ कहाँ
सरकार रोशनी का मजा हम से पूछिए

वो जान ही गए हैं कि हमें उन से प्यार है
आँखों की मुखबरी का मजा हम से पूछिए

हँसने का शौक हम को भी था आप की तरह
हँसिये मगर हँसने का मजा हम से पूछिए

हम तौबा कर के मर गए बे – मौत ऐ “खुमार”
तौहीन – ए – मय – कशी का मजा हम से पूछिए

खुमार बाराबंकी
#Azhan

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इक पल में सदी का मजा हम से पूछिए
दो दिन में जिंदगी का मजा हम से पूछिए

भूलें हैं रफ्ता रफ्ता उन्हें मुद्दतों में हम
किस्तों में खुद – कुशी का मजा हम से पूछिए

आगाज – ए – आशिकी का मजा आप जानिए
अंजाम – ए – आशिकी का मजा हम से पूछिए

जलते दीयों में जलते घरों जैसी लौ कहाँ
सरकार रोशनी का मजा हम से पूछिए

वो जान ही गए हैं कि हमें उन से प्यार है
आँखों की मुखबरी का मजा हम से पूछिए

हँसने का शौक हम को भी था आप की तरह
हँसिये मगर हँसने का मजा हम से पूछिए

हम तौबा कर के मर गए बे – मौत ऐ “खुमार”
तौहीन – ए – मय – कशी का मजा हम से पूछिए

खुमार बाराबंकी
#Azhan

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हम गए थे उनके घर …

हम गए थे उनके घर
RED ROSES
ले कर ये कहने
.😕
की
.
“तूँ आपन दिल हमरा के देबु का ”
.
उनकी मम्मी ने खोला दरवाजा, 😾
.
हम घबरा के बोले,😅
.😬
ए चाची !!!
“2 रुपया में गुलाब लेबु का “😜😜😜

#Azhan😍😘

हम गए थे उनके घर
RED ROSES
ले कर ये कहने
.😕
की
.
“तूँ आपन दिल हमरा के देबु का ”
.
उनकी मम्मी ने खोला दरवाजा, 😾
.
हम घबरा के बोले,😅
.😬
ए चाची !!!
“2 रुपया में गुलाब लेबु का “😜😜😜

#Azhan😍😘

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हसरतों से भरी …

हसरतों से भरी जनवरी तुझे खुदा हाफिज..
.
इजहार ए इश्क़ की फरवरी तुझे सलाम..!!
#Azhan

हसरतों से भरी जनवरी तुझे खुदा हाफिज..
.
इजहार ए इश्क़ की फरवरी तुझे सलाम..!!
#Azhan

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बशीर बद्र साहब …

बशीर बद्र साहब

पत्थर के जिगर वालों, ग़म में वो रवानी है
खुदा राह बना लेगा, बहता हुआ पानी है

फूलों में ग़ज़ल रखना, ये रात की रानी है
इस में तेरी ज़ुल्फ़ों की बे-रब्त कहानी है

इक ज़ेहने परेशां में वो फूल सा चेहरा है
पत्थर की हिफाज़त में शीशे की जवानी है

क्यूँ चांदनी रातों में दरया पे नहाते हो
सोए हुए पानी में क्या आग लगनी है

इस हौसला ए दिल पर हम ने भी कफ़न पहना
हंसकर कोई पूछेगा क्या जान गवानी है

रोने का असर दिल पर रह रह के बदलता है
आंसू कभी शीशा है, आंसू कभी पानी है

ये शबनमी लहजा है, आहिस्ता ग़ज़ल पढ़ना
तितली की कहानी है, फूलों की ज़ुबानी है
#Azhan

बशीर बद्र साहब

पत्थर के जिगर वालों, ग़म में वो रवानी है
खुदा राह बना लेगा, बहता हुआ पानी है

फूलों में ग़ज़ल रखना, ये रात की रानी है
इस में तेरी ज़ुल्फ़ों की बे-रब्त कहानी है

इक ज़ेहने परेशां में वो फूल सा चेहरा है
पत्थर की हिफाज़त में शीशे की जवानी है

क्यूँ चांदनी रातों में दरया पे नहाते हो
सोए हुए पानी में क्या आग लगनी है

इस हौसला ए दिल पर हम ने भी कफ़न पहना
हंसकर कोई पूछेगा क्या जान गवानी है

रोने का असर दिल पर रह रह के बदलता है
आंसू कभी शीशा है, आंसू कभी पानी है

ये शबनमी लहजा है, आहिस्ता ग़ज़ल पढ़ना
तितली की कहानी है, फूलों की ज़ुबानी है
#Azhan

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ज़िंदगी को ज़ख़्म …

ज़िंदगी को ज़ख़्म की लज़्ज़त से मत महरूम कर
रास्ते के पत्थरों से ख़ैरियत मालूम कर

टूट कर बिखरी हुई तलवार के टुकड़े समेट
और अपने हार जाने का सबब मालूम कर

जागती आँखों के ख़्वाबों को ग़ज़ल का नाम दे
रात भर की करवटों का ज़ाइक़ा मंजूम कर

शाम तक लौट आऊँगा हाथों का ख़ाली-पन लिए
आज फिर निकला हूँ मैं घर से हथेली चूम कर

मत सिखा लहजे को अपनी बर्छियों के पैंतरे
ज़िंदा रहना है तो लहजे को ज़रा मासूम कर

सर राहत इंदौरी
#Azhan

ज़िंदगी को ज़ख़्म की लज़्ज़त से मत महरूम कर
रास्ते के पत्थरों से ख़ैरियत मालूम कर

टूट कर बिखरी हुई तलवार के टुकड़े समेट
और अपने हार जाने का सबब मालूम कर

जागती आँखों के ख़्वाबों को ग़ज़ल का नाम दे
रात भर की करवटों का ज़ाइक़ा मंजूम कर

शाम तक लौट आऊँगा हाथों का ख़ाली-पन लिए
आज फिर निकला हूँ मैं घर से हथेली चूम कर

मत सिखा लहजे को अपनी बर्छियों के पैंतरे
ज़िंदा रहना है तो लहजे को ज़रा मासूम कर

सर राहत इंदौरी
#Azhan

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जाते जाते वो मुझे …

जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया
उम्र भर दोहराऊँगा ऐसी कहानी दे गया

उससे मैं कुछ पा सकूँ ऐसी कहाँ उम्मीद थी
ग़म भी वो शायद बरा-ए-मेहरबानी दे गया

सब हवायें ले गया मेरे समंदर की कोई
और मुझ को एक कश्ती बादबानी दे गया

ख़ैर मैं प्यासा रहा पर उस ने इतना तो किया
मेरी पलकों की कतारों को वो पानी दे गया
@@@##javed akhtar##@@@
#Azhan

जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया
उम्र भर दोहराऊँगा ऐसी कहानी दे गया

उससे मैं कुछ पा सकूँ ऐसी कहाँ उम्मीद थी
ग़म भी वो शायद बरा-ए-मेहरबानी दे गया

सब हवायें ले गया मेरे समंदर की कोई
और मुझ को एक कश्ती बादबानी दे गया

ख़ैर मैं प्यासा रहा पर उस ने इतना तो किया
मेरी पलकों की कतारों को वो पानी दे गया
@@@##javed akhtar##@@@
#Azhan

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दर्द के इश्क़ है …

दर्द के इश्क़ है उसका कोई अंजाम नही होता।
शहर में चर्चे बहुत मेरे में गुमनाम नही होता।

पढ़ता रहा में क़लाम के मोहबब्त दिल से मगर
शोहरा ए मोहबब्त में भी मेरा नाम नही होता।

की उसने इल्ज़ाम तराशी मुझे बहुत लोगो से।
अख़लाक़ मेरे सही थे इसलिए बदनाम नही होता।

खड़ा किया बाज़ार में बेचने को चौराहे शहर के।
क़ीमती सामान का कभी कोई दाम नही होता।

जल गई बस्तियां उजड़ गये आशियाने गरीबो के।
मगर शहर किसी अख़बार में उनका नाम नही होता।

अमीर ए शहर की शौहरत सभी की ज़ुबाँ पर लेकिन
मेरे मुफ़लिसी का तज़करा किसी क़लाम नही होता।

फुर्सत नही लम्हो किसी को शहर में इंसान अभी।
फसाद हो रहे बहुत इंसानियत कोई काम नही होता।

उड़ते रही ख़ाक जलते रहे झोपड़े मेरे ही गाँव के।
बोलती रही ज़ुबाँ मगर किस्सा कभी तमाम नही होता

पड़ते रहे निशान मेरे कदमो मन्ज़िल की राह में।
सिलसिले चलते रहे मुलाकात के वक़्त नही होता।

दर्द बहुत दिया मेरे अपनो ने इंसानियत में मगर।
अब मुझसे दर्द ए अहसास भी ज़ब्त नही होता।

मुल्क में बाँटते रहे रिसाले अमन के लोगो के दरमियाँ।
उन रिसालों में आरिफ़ कही कोई पैग़ाम nhi hota‎
#Azhan

दर्द के इश्क़ है उसका कोई अंजाम नही होता।
शहर में चर्चे बहुत मेरे में गुमनाम नही होता।

पढ़ता रहा में क़लाम के मोहबब्त दिल से मगर
शोहरा ए मोहबब्त में भी मेरा नाम नही होता।

की उसने इल्ज़ाम तराशी मुझे बहुत लोगो से।
अख़लाक़ मेरे सही थे इसलिए बदनाम नही होता।

खड़ा किया बाज़ार में बेचने को चौराहे शहर के।
क़ीमती सामान का कभी कोई दाम नही होता।

जल गई बस्तियां उजड़ गये आशियाने गरीबो के।
मगर शहर किसी अख़बार में उनका नाम नही होता।

अमीर ए शहर की शौहरत सभी की ज़ुबाँ पर लेकिन
मेरे मुफ़लिसी का तज़करा किसी क़लाम नही होता।

फुर्सत नही लम्हो किसी को शहर में इंसान अभी।
फसाद हो रहे बहुत इंसानियत कोई काम नही होता।

उड़ते रही ख़ाक जलते रहे झोपड़े मेरे ही गाँव के।
बोलती रही ज़ुबाँ मगर किस्सा कभी तमाम नही होता

पड़ते रहे निशान मेरे कदमो मन्ज़िल की राह में।
सिलसिले चलते रहे मुलाकात के वक़्त नही होता।

दर्द बहुत दिया मेरे अपनो ने इंसानियत में मगर।
अब मुझसे दर्द ए अहसास भी ज़ब्त नही होता।

मुल्क में बाँटते रहे रिसाले अमन के लोगो के दरमियाँ।
उन रिसालों में आरिफ़ कही कोई पैग़ाम nhi hota‎
#Azhan

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अपनी आवाज की …

अपनी आवाज की लर्जिश पे तो काबू पा लूँ
प्यार के बोल तो होटों से निकल जाते हैं .
अपने तेवर को सम्भालो की कोई ये ना कहें
दिल बदलते हैं तो चेहरे भी बदल जाते हैं
#Azhan

अपनी आवाज की लर्जिश पे तो काबू पा लूँ
प्यार के बोल तो होटों से निकल जाते हैं .
अपने तेवर को सम्भालो की कोई ये ना कहें
दिल बदलते हैं तो चेहरे भी बदल जाते हैं
#Azhan

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इतना इतराया ना …

इतना इतराया ना करो अपने #हुस्न _ओ _रुख्सर प़र
ज़रा गौर से देखिये अपना हुस्न
,,#कारड 💳 _य़े _आधार प़र ……..
#Azhan

इतना इतराया ना करो अपने #हुस्न _ओ _रुख्सर प़र
ज़रा गौर से देखिये अपना हुस्न
,,#कारड 💳 _य़े _आधार प़र ……..
#Azhan

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कहाँ से लाये हो …

कहाँ से लाये हो अंदाज़ इतने मुस्कुराने के
तुम्हारा दिल मुझे टूटा हुआ मालूम होता है

मैं इस आलम-ए-तन्हाई में भी तन्हा नहीं ऐ दोस्त
मुझे हर एक आंसू आशना मालूम होता है
#Azhan

कहाँ से लाये हो अंदाज़ इतने मुस्कुराने के
तुम्हारा दिल मुझे टूटा हुआ मालूम होता है

मैं इस आलम-ए-तन्हाई में भी तन्हा नहीं ऐ दोस्त
मुझे हर एक आंसू आशना मालूम होता है
#Azhan

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