Etbaar

ये मज़ा था दिल्लगी का कि बराबर आग लगती;
न तुम्हें क़रार होता न हमें क़रार होता;

तेरे वादे पर सितमगर अभी और सब्र करते;
अगर अपनी जिन्दगी का हमें ऐतबार होता।

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