दर्द तो कोई समझे …

दर्द तो कोई समझे अख़बार बेचने वाले का
ख़बर बेचने वाले की ख़बर कोई नहीं रखता।
#नीलाभ

दर्द तो कोई समझे अख़बार बेचने वाले का
ख़बर बेचने वाले की ख़बर कोई नहीं रखता।
#नीलाभ

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सीमा ढह ही जाती है …

सीमा ढह ही जाती है
नज़र कह ही जाती है।

दुख की उम्र होती है
रात कट ही जाती है।

जमीं जब जायदाद हो
फिर बँट ही जाती है।

लहर की ये नियति है
टूट वो बह ही जाती है।

मर्यादा के भ्रम ख़ातिर
सीता सह ही जाती है।

#नीलाभ

सीमा ढह ही जाती है
नज़र कह ही जाती है।

दुख की उम्र होती है
रात कट ही जाती है।

जमीं जब जायदाद हो
फिर बँट ही जाती है।

लहर की ये नियति है
टूट वो बह ही जाती है।

मर्यादा के भ्रम ख़ातिर
सीता सह ही जाती है।

#नीलाभ

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अगर गुलाब देने से …

अगर गुलाब देने से मोहब्बत होती तो माली सारे शहर का महबूब होता..😎

अगर गुलाब देने से मोहब्बत होती तो माली सारे शहर का महबूब होता..😎

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औरत मोहताज़ नही …

औरत मोहताज़ नही किसी गुलाब की.

वो खुद ही प्रेम का प्रतीक होती है.

#ऋषि

औरत मोहताज़ नही किसी गुलाब की.

वो खुद ही प्रेम का प्रतीक होती है.

#ऋषि

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आते है दिन हर किसी …

आते है दिन हर किसी के बेहतर,
जिन्दगी के समंदर में हमेशा तुफान नहीं रहते..😎

आते है दिन हर किसी के बेहतर,
जिन्दगी के समंदर में हमेशा तुफान नहीं रहते..😎

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