यूँ हर एक शख्स में …

यूँ हर एक शख्स में अब, मत ढूँढ तू मुझको;
मैं “अक्स” हूँ ‘साहब’, मेरा किरदार ही अलग है!
.
झूठ के सिक्कों से, हर चीज़ मिल ही जाती है;
पर जहाँ मैं भी बिक जाऊं, वो बाज़ार ही अलग है!
.
यूँ तो हुस्न वाले, कम नहीं हैं इस दुनिया में;
पर जिसपे मैं फ़ना हूँ, वो हुस्न-ए-यार ही अलग है!
.
यूँ तो इन्तज़ार करना, मेरी फितरत में नहीं शामिल;
पर तेरी बात कुछ और है, तेरा इन्तज़ार ही अलग है!
.
राँझा, फ़रहाद, मजनू अब, गुज़रा हुआ कल हैं;
मैं ख़ुद ही ख़ुद की मिसाल हूँ, मेरा प्यार ही अलग है!!..

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यूँ हर एक शख्स में अब, मत ढूँढ तू मुझको;
मैं “अक्स” हूँ ‘साहब’, मेरा किरदार ही अलग है!
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झूठ के सिक्कों से, हर चीज़ मिल ही जाती है;
पर जहाँ मैं भी बिक जाऊं, वो बाज़ार ही अलग है!
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यूँ तो हुस्न वाले, कम नहीं हैं इस दुनिया में;
पर जिसपे मैं फ़ना हूँ, वो हुस्न-ए-यार ही अलग है!
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यूँ तो इन्तज़ार करना, मेरी फितरत में नहीं शामिल;
पर तेरी बात कुछ और है, तेरा इन्तज़ार ही अलग है!
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राँझा, फ़रहाद, मजनू अब, गुज़रा हुआ कल हैं;
मैं ख़ुद ही ख़ुद की मिसाल हूँ, मेरा प्यार ही अलग है!!..

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मैं मुसाफ़िर हूँ …

मैं मुसाफ़िर हूँ ख़तायें भी हुई होंगी मुझसे
तुम तराज़ू में मग़र मेरे पाँव के छाले रखना

मैं मुसाफ़िर हूँ ख़तायें भी हुई होंगी मुझसे
तुम तराज़ू में मग़र मेरे पाँव के छाले रखना

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कुछ अमल भी ज़रूरी है, इबादत के लिए; सिर्फ सजदा…

कुछ अमल भी ज़रूरी है, इबादत के लिए;
सिर्फ सजदा करने से, किसी को जन्नत नहीं मिलती।

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टूटी – फूटी शायरी में लिख दिया है डायरी में…

टूटी – फूटी शायरी में
लिख दिया है डायरी में
आख़िरी ख़्वाहिश हो तुम
लास्ट फ़रमाइश हो तुम..!!

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कभी-कभी थोड़ा सा *पागलपन* भी अच्छा होता है, हमारी ज़िन्दगी…

कभी-कभी थोड़ा सा *पागलपन* भी अच्छा होता है, हमारी ज़िन्दगी में *मासूमियत* और *मासूम प्रेम* को ज़िंदा रखने के लिए।

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“बन गया अजीब सा रिश्ता हमारा…”यारों” .वो मोहब्बत ना कर…

“बन गया अजीब सा रिश्ता हमारा…”यारों”
.वो मोहब्बत ना कर सके हम नफरत ना कर सके…!!

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ღღ_मन्दिर की आरती, …

ღღ_मन्दिर की आरती, मस्ज़िद की अज़ान जैसा है;
तू मेरे लिए मेरे महबूब, मेरे भगवान जैसा है!
.
पूछा था तूने कल शब, जो इक ख़ामोश-सा सवाल;
मेरे लिए वो अब भी, एक इम्तिहान जैसा है!
.
रूह में जगह देकर, अब फासले की ख्वाहिश;
तेरा दिल क्या, किराये के मकान जैसा है!
.
तुझे रोकता भी तो कैसे, ख़ातिर-ए-मोहब्बत;
तू तो मेरे हबीब, परिन्दों की उड़ान जैसा है!
.
तेरी यादें बरस रही हैं, सावन की तरह बे-हद;
और दिल मेरा, किसी मिट्टी के मकान जैसा है!
.
गर मैं हूँ, तभी तू है, और तू है तो ही मैं हूँ;
मेरे लिए तू “अक्स”, मेरी पहचान जैसा है!!…..

ღღ_मन्दिर की आरती, मस्ज़िद की अज़ान जैसा है;
तू मेरे लिए मेरे महबूब, मेरे भगवान जैसा है!
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पूछा था तूने कल शब, जो इक ख़ामोश-सा सवाल;
मेरे लिए वो अब भी, एक इम्तिहान जैसा है!
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रूह में जगह देकर, अब फासले की ख्वाहिश;
तेरा दिल क्या, किराये के मकान जैसा है!
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तुझे रोकता भी तो कैसे, ख़ातिर-ए-मोहब्बत;
तू तो मेरे हबीब, परिन्दों की उड़ान जैसा है!
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तेरी यादें बरस रही हैं, सावन की तरह बे-हद;
और दिल मेरा, किसी मिट्टी के मकान जैसा है!
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गर मैं हूँ, तभी तू है, और तू है तो ही मैं हूँ;
मेरे लिए तू “अक्स”, मेरी पहचान जैसा है!!…..

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सस्ता सा कोई इलाज़ बता दो इस मोहब्बत का ,…

सस्ता सा कोई इलाज़ बता दो इस मोहब्बत का ,
एक गरीब इश्क़ कर बैठा है इस महंगाई के दौर मैं .!!

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ये मोहब्बत आसानी से हो तो जाती है, पर आसानी…

ये मोहब्बत आसानी से हो तो जाती है,
पर आसानी से भुलाई नहीं जाती….!!!!

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