ज़िंदा रहने का…..कुछ ऐसा ‘अन्दाज़’ रखो, जो तुमको ना समझे…..उन्हें…

ज़िंदा रहने का…..कुछ ऐसा ‘अन्दाज़’ रखो,
जो तुमको ना समझे…..उन्हें ‘नज़रंदाज’ रखो.!!

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Samandar

समंदर बनके क्या फायदा, बनना है तो तालाब बनो…
जहाँ शेर भी पानी पीता है, लेकिन सर झुका कर

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Muhabbat

दिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती
ख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती

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Diya

आँधियों के इरादे तो अच्छे न थे 
ये दिया कैसे जलता हुआ रह गया

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Asool

उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी है
जो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है

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Chiraag

बुझने से जिस चिराग ने इंकार कर दिया ,
चक्कर लगा रही हैं हवा उसी के आस पास…!!!

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Dil

लाखों में इंतिख़ाब के क़ाबिल बना दिया
जिस दिल को तुमने देख लिया दिल बना दिया

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Shayar

हम तो शायर हैं सियासत नहीं आती हमको
हम से मुंह देखकर लहजा नहीं बदला जाता

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