Waqt ne kiya kya hansi sitam

वक्त ने किया क्या हंसी सितम 
तुम रहे न तुम, हम रहे न हम । 

बेक़रार दिल इस तरह मिले 
जिस तरह कभी हम जुदा न थे 
तुम भी खो गए, हम भी खो गए 
इक राह पर चल के दो कदम ।

जायेंगे कहाँ सूझता नहीं 
चल पड़े मगर रास्ता नहीं 
क्या तलाश है, कुछ पता नहीं 
बुन रहे क्यूँ ख़्वाब दम-ब-दम ।

Kaifi azmi

Posted by | View Post | View Group
Advertisements

Bas ek jhijhak hai

बस इक झिझक है यही हाल-ए-दिल सुनाने में 
कि तेरा ज़िक्र भी आयेगा इस फ़साने में 

बरस पड़ी थी जो रुख़ से नक़ाब उठाने में 
वो चाँदनी है अभी तक मेरे ग़रीब-ख़ाने में 

इसी में इश्क़ की क़िस्मत बदल भी सकती थी 
जो वक़्त बीत गया मुझ को आज़माने में 

ये कह के टूट पड़ा शाख़-ए-गुल से आख़िरी फूल 
अब और देर है कितनी बहार आने में 

Kaifi azmi

Posted by | View Post | View Group

Pehla salam

एक रंगीन झिझक एक सादा पयाम
कैसे भूलूँ किसी का वो पहला सलाम
फूल रुख़्सार के रसमसाने लगे
हाथ उठा क़दम डगमगाने लगे
रंग-सा ख़ाल-ओ-ख़द से छलकने लगा
सर से रंगीन आँचल ढलकने लगा
अजनबियत निगाहें चुराने लगी
दिन धड़कने लगा लहर आने लगी
साँस में इक गुलाबी गिरह पड़ गई
होंठ थरथराये सिमटे नज़र गड़ गई
रह गया उम्र भर के लिये ये हिजाब
क्यों न संभला हुआ दे सका मैं जवाब
क्यों मैं बे-क़स्द बे-अज़्म बे-वास्ता
दूसरी सम्त घबरा के तकने लगा

Kaifi azmi

Posted by | View Post | View Group

पत्थर के ख़ुदा वहाँ भी पाए ।
हम चाँद से आज लौट आए ।

दीवारें तो हर तरफ़ खड़ी हैं
क्या हो गया मेहरबान साए ।

जंगल की हवाएँ आ रही हैं
काग़ज़ का ये शहर उड़ न जाए ।

लैला ने नया जन्म लिया है
है क़ैस  कोई जो दिल लगाए ।

है आज ज़मीं का गुस्ले-सेहत
जिस दिल में हो जितना ख़ून लाए ।

सहरा-सहरा लहू के ख़ेमे
फिए प्यासे लबे-फ़रात आए ।

Kaifi azmi

Posted by | View Post | View Group

Main yeh sochkar uske dar se ootha tha

मैं यह सोचकर उसके दर से उठा था
कि वह रोक लेगी मना लेगी मुझको ।

हवाओं में लहराता आता था दामन
कि दामन पकड़कर बिठा लेगी मुझको ।

क़दम ऐसे अंदाज़ से उठ रहे थे
कि आवाज़ देकर बुला लेगी मुझको ।

कि उसने रोका न मुझको मनाया
न दामन ही पकड़ा न मुझको बिठाया ।

न आवाज़ ही दी न मुझको बुलाया
मैं आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ता ही आया ।

यहाँ तक कि उससे जुदा हो गया मैं
जुदा हो गया मैं, जुदा हो गया मैं ।

Kaifi azmi

Posted by | View Post | View Group

Main dhundhta hoon jise wo jahan nahi milta

मैं ढूँढता हूँ जिसे वो जहाँ नहीं मिलता
नई ज़मीं नया आसमाँ नहीं मिलता

नई ज़मीं नया आसमाँ मिल भी जाये
नए बशर का कहीं कुछ निशाँ नहीं मिलता

वो तेग़ मिल गई जिससे हुआ है क़त्ल मेरा
किसी के हाथ का उस पर निशाँ नहीं मिलता

वो मेरा गाँव है वो मेरे गाँव के चूल्हे
कि जिनमें शोले तो शोले धुआँ नहीं मिलता

जो इक ख़ुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यूँ
यहाँ तो कोई मेरा हमज़बाँ नहीं मिलता

खड़ा हूँ कब से मैं चेहरों के एक जंगल में
तुम्हारे चेहरे-सा कुछ भी यहाँ नहीं मिलता

Kaifi azmi

Posted by | View Post | View Group

Mere dil main tu hi tu hai

मेरे दिल में तू ही तू है दिल की दवा क्या करूँ 
दिल भी तू है जाँ भी तू है तुझपे फ़िदा क्या करूँ 

ख़ुद को खोकर तुझको पा कर क्या क्या मिला क्या कहूँ 
तेरा होके जीने में क्या क्या आया मज़ा क्या कहूँ 
कैसे दिन हैं कैसी रातें कैसी फ़िज़ा क्या कहूँ 
मेरी होके तूने मुझको क्या क्या दिया क्या कहूँ 
मेरी पहलू में जब तू है फिर मैं दुआ क्या करूँ 
दिल भी तू है जाँ भी तू है तुझपे फ़िदा क्या करूँ 

है ये दुनिया दिल की दुनिया, मिलके रहेंगे यहाँ 
लूटेंगे हम ख़ुशियाँ हर पल, दुख न सहेंगे यहाँ 
अरमानों के चंचल धारे ऐसे बहेंगे यहाँ 
ये तो सपनों की जन्नत है सब ही कहेंगे यहाँ 
ये दुनिया मेरे दिल में बसी है दिल से जुदा क्या करूँ 
दिल भी तू है जाँ भी तू है तुझपे फ़िदा क्या करूँ 

Kaifi azmi

Posted by | View Post | View Group

Mashware

पीरी:
ये आँधी ये तूफ़ान ये तेज़ धारे
कड़कते तमाशे गरजते नज़ारे
अंधेरी फ़ज़ा साँस लेता समन्दर
न हमराह मिशाल न गर्दूँ पे तारे

मुसाफ़िर ख़ड़ा रह अभी जी को मारे

शबाब:
उसी का है साहिल उसी के कगारे
तलातुम में फँसकर जो दो हाथ मारे
अंधेरी फ़ज़ा साँस लेता समन्दर
यूँ ही सर पटकते रहेंगे ये धारे

कहाँ तक चलेगा किनारे-किनारे

Kaifi azmi

Posted by | View Post | View Group

Makaan

आज की रात बहुत गर्म हवा चलती है 
आज की रात न फ़ुटपाथ पे नींद आएगी 
सब उठो, मैं भी उठूँ, तुम भी उठो, तुम भी उठो
कोई खिड़की इसी दीवार में खुल जाएगी 

ये ज़मीन तब भी निगल लेने पे आमादा थी 
पाँव जब टूटी शाख़ों से उतारे हम ने 
इन मकानों को ख़बर है न मकीनों को ख़बर 
उन दिनों की जो गुफ़ाओं में गुज़ारे हम ने 

हाथ ढलते गये साँचे में तो थकते कैसे 
नक़्श के बाद नये नक़्श निखारे हम ने 
की ये दीवार बुलन्द, और बुलन्द, और बुलन्द
बाम-ओ-दर और ज़रा, और सँवारे हम ने 

आँधियाँ तोड़ लिया करती थीं शमों की लौएं 
जड़ दिये इस लिये बिजली के सितारे हम ने 
बन गया क़स्र तो पहरे पे कोई बैठ गया 
सो रहे ख़ाक पे हम शोरिश-ए-तामीर लिये 

अपनी नस-नस में लिये मेहनत-ए-पैहम की थकन 
बंद आँखों में इसी क़स्र की तस्वीर लिये 
दिन पिघलता है इसी तरह सरों पर अब तक 
रात आँखों में ख़टकती है स्याह तीर लिये 

आज की रात बहुत गर्म हवा चलती है 
आज की रात न फ़ुट-पाथ पे नींद आयेगी 
सब उठो, मैं भी उठूँ, तुम भी उठो, तुम भी उठो 
कोई खिड़की इसी दीवार में खुल जायेगी 

Kaifi azmi

Posted by | View Post | View Group

Jhuki jhuki se nazar bekarar hai ki nahi

झुकी झुकी सी नज़र बेक़रार है कि नहीं 
दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं 

तू अपने दिल की जवाँ धड़कनों को गिन के बता 
मेरी तरह तेरा दिल बेक़रार है कि नहीं 

वो पल के जिस में मुहब्बत जवान होती है 
उस एक पल का तुझे इंतज़ार है कि नहीं 

तेरी उम्मीद पे ठुकरा रहा हूँ दुनिया को 
तुझे भी अपने पे ये ऐतबार है कि नहीं

Kaifi azmi

Posted by | View Post | View Group