Ab agar aao to jane ke liye mat aana

अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आना

सिर्फ एहसान जताने के लिए मत आना

मैंने पलकों पे तमन्‍नाएँ सजा रखी हैं
दिल में उम्‍मीद की सौ शम्‍मे जला रखी हैं
ये हसीं शम्‍मे बुझाने के लिए मत आना

प्‍यार की आग में जंजीरें पिघल सकती हैं
चाहने वालों की तक़दीरें बदल सकती हैं
तुम हो बेबस ये बताने के लिए मत आना

अब तुम आना जो तुम्‍हें मुझसे मुहब्‍बत है कोई
मुझसे मिलने की अगर तुमको भी चाहत है कोई
तुम कोई रस्‍म निभाने के लिए मत आना

Javed akhtar

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Aap bhi aaiye hamko bhi bulate rahiye

आप भी आइए हमको भी बुलाते रहिए

दोस्‍ती ज़ुर्म नहीं दोस्‍त बनाते रहिए।

ज़हर पी जाइए और बाँटिए अमृत सबको
ज़ख्‍म भी खाइए और गीत भी गाते रहिए।

वक्‍त ने लूट लीं लोगों की तमन्‍नाएँ भी,
ख़्वाब जो देखिए औरों को दिखाते रहिए।

शक्‍ल तो आपके भी ज़हन में होगी कोई,
कभी बन जाएगी तसवीर बनाते रहिए।

Javed akhtar

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Yahi halaat ebtada se rahe

यही हालात इब्तदा से रहे 

लोग हमसे ख़फ़ा-ख़फ़ा-से रहे 

बेवफ़ा तुम कभी न थे लेकिन 
ये भी सच है कि बेवफ़ा-से रहे 

इन चिराग़ों में तेल ही कम था 
क्यों गिला फिर हमें हवा से रहे 

बहस, शतरंज, शेर, मौसीक़ी
तुम नहीं रहे तो ये दिलासे रहे 

उसके बंदों को देखकर कहिये 
हमको उम्मीद क्या ख़ुदा से रहे 

ज़िन्दगी की शराब माँगते हो 
हमको देखो कि पी के प्यासे रहे

Javed akhtar

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Misaal iski kahan hai zamane mein

मिसाल इसकी कहाँ है ज़माने में 

कि सारे खोने के ग़म पाये हमने पाने में 

वो शक्ल पिघली तो हर शै में ढल गई जैसे 
अजीब बात हुई है उसे भुलाने में 

जो मुंतज़िर न मिला वो तो हम हैं शर्मिंदा 
कि हमने देर लगा दी पलट के आने में 

लतीफ़ था वो तख़य्युल से, ख़्वाब से नाज़ुक 
गँवा दिया उसे हमने ही आज़माने में 

समझ लिया था कभी एक सराब का दरिया 
पर एक सुकून था हमको फ़रेब खाने में 

झुका दरख़्त हवा से, तो आँधियों ने कहा 
ज़ियादा फ़र्क़ नहीं झुक के टूट जाने में

Javed akhtar

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Maine dil se kaha

मैनें दिल से कहा 

ऐ दीवाने बता 
जब से कोई मिला 
तू है खोया हुआ 
ये कहानी है क्या 
है ये क्या सिलसिला 
ऐ दीवाने बता 

मैनें दिल से कहा 
ऐ दीवाने बता 
धड़कनों में छुपी 
कैसी आवाज़ है 
कैसा ये गीत है 
कैसा ये साज़ है 
कैसी ये बात है 
कैसा ये राज़ है 
ऐ दीवाने बता 

मेरे दिल ने कहा 
जब से कोई मिला 
चाँद तारे फ़िज़ा 
फूल भौंरे हवा 
ये हसीं वादियाँ 
नीला ये आसमाँ 
सब है जैसे नया 
मेरे दिल ने कहा 

Javed akhtar

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Kabhi yoon bhi to ho

कभी यूँ भी तो हो 

दरिया का साहिल हो 
पूरे चाँद की रात हो 
और तुम आओ 

कभी यूँ भी तो हो 
परियों की महफ़िल हो 
कोई तुम्हारी बात हो 
और तुम आओ 

कभी यूँ भी तो हो 
ये नर्म मुलायम ठंडी हवायें 
जब घर से तुम्हारे गुज़रें 
तुम्हारी ख़ुश्बू चुरायें 
मेरे घर ले आयें 

कभी यूँ भी तो हो 
सूनी हर मंज़िल हो 
कोई न मेरे साथ हो 
और तुम आओ 

कभी यूँ भी तो हो 
ये बादल ऐसा टूट के बरसे 
मेरे दिल की तरह मिलने को 
तुम्हारा दिल भी तरसे 
तुम निकलो घर से 

कभी यूँ भी तो हो 
तनहाई हो, दिल हो 
बूँदें हो, बरसात हो 
और तुम आओ 

कभी यूँ भी तो हो

Javed akhtar

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Jaate jaate wo mujhe achhi nishani de gaya

जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया 

उम्र भर दोहराऊँगा ऐसी कहानी दे गया 

उससे मैं कुछ पा सकूँ ऐसी कहाँ उम्मीद थी 
ग़म भी वो शायद बरा-ए-मेहरबानी दे गया 

सब हवायें ले गया मेरे समंदर की कोई 
और मुझ को एक कश्ती बादबानी दे गया 

ख़ैर मैं प्यासा रहा पर उस ने इतना तो किया 
मेरी पलकों की कतारों को वो पानी दे गया

Javed akhtar

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Dard apnata hai paraye kon

दर्द अपनाता है पराए कौन 

कौन सुनता है और सुनाए कौन 

कौन दोहराए वो पुरानी बात
ग़म अभी सोया है जगाए कौन 

वो जो अपने हैं क्या वो अपने हैं 
कौन दुख झेले आज़माए कौन 

अब सुकूँ है तो भूलने में है 
लेकिन उस शख़्स को भुलाए कौन

आज फिर दिल है कुछ उदास उदास
देखिये आज याद आए कौन.

Javed akhtar

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Tamanna fhir machal jaye

तमन्‍ना फिर मचल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ
यह मौसम ही बदल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ

मुझे गम है कि मैने जिन्‍दगी में कुछ नहीं पाया
ये ग़म दिल से निकल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ

नहीं मिलते हो मुझसे तुम तो सब हमदर्द हैं मेरे
ज़माना मुझसे जल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ

ये दुनिया भर के झगड़े, घर के किस्‍से, काम की बातें
बला हर एक टल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ

Javed akhtar

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