Ye tera ghar ye mera ghar

ये तेरा घर ये मेरा घर, किसी को देखना हो गर 

तो पहले आके माँग ले, मेरी नज़र तेरी नज़र 
ये घर बहुत हसीन है

न बादलों की छाँव में, न चाँदनी के गाँव में 
न फूल जैसे रास्ते, बने हैं इसके वास्ते 
मगर ये घर अजीब है, ज़मीन के क़रीब है 
ये ईँट पत्थरों का घर, हमारी हसरतों का घर 

जो चाँदनी नहीं तो क्या, ये रोशनी है प्यार की 
दिलों के फूल खिल गये, तो फ़िक्र क्या बहार की 
हमारे घर ना आयेगी, कभी ख़ुशी उधार की 
हमारी राहतों का घर, हमारी चाहतों का घर 

यहाँ महक वफ़ाओं की है, क़हक़हों के रंग है 
ये घर तुम्हारा ख़्वाब है, ये घर मेरी उमंग है 
न आरज़ू पे क़ैद है, न हौसले पर जंग है 
हमारे हौसले का घर, हमारी हिम्मतों का घर

Javed akhtar

Posted by | View Post | View Group
Advertisements

Ye bata de mujhe zindagi

ये बता दे मुझे ज़िन्दगी 

प्यार की राह के हमसफ़र
किस तरह बन गये अजनबी 
ये बता दे मुझे ज़िन्दगी 
फूल क्यूँ सारे मुरझा गये 
किस लिये बुझ गई चाँदनी 
ये बता दे मुझे ज़िन्दगी 

कल जो बाहों में थी 
और निगाहों में थी 
अब वो गर्मी कहाँ खो गई
न वो अंदाज़ है 
न वो आवाज़ है 
अब वो नर्मी कहाँ खो गई 
ये बता दे मुझे ज़िन्दगी 

बेवफ़ा तुम नहीं 
बेवफ़ा हम नहीं 
फिर वो जज़्बात क्यों सो गये 
प्यार तुम को भी है 
प्यार हम को भी है 
फ़ासले फिर ये क्या हो गये
ये बता दे मुझे ज़िन्दगी 

Javed akhtar

Posted by | View Post | View Group

Kyun zindgi ki raah mein mazboor ho gaye

क्यूँ ज़िन्दगी की राह में मजबूर हो गए 

इतने हुए करीब कि हम दूर हो गए 

ऐसा नहीं कि हमको कोई भी खुशी नहीं 
लेकिन ये ज़िन्दगी तो कोई ज़िन्दगी नहीं 
क्यों इसके फ़ैसले हमें मंज़ूर हो गए 

पाया तुम्हें तो हमको लगा तुमको खो दिया 
हम दिल पे रोए और ये दिल हम पे रो दिया 
पलकों से ख़्वाब क्यों गिरे क्यों चूर हो गए 

Javed akhtar

Posted by | View Post | View Group

Tumko dekha to ye khyaal aaya

तुमको देखा तो ये ख़याल आया 

ज़िन्दगी धूप तुम घना साया 

आज फिर दिल ने एक तमन्ना की 
आज फिर दिल को हमने समझाया 

तुम चले जाओगे तो सोचेंगे 
हमने क्या खोया, हमने क्या पाया

हम जिसे गुनगुना नहीं सकते 
वक़्त ने ऐसा गीत क्यूँ गाया 

Javed akhtar

Posted by | View Post | View Group

Pyar mujhse jo kiya tumne to kya paogi

प्यार मुझसे जो किया तुमने तो क्या पाओगी 

मेरे हालात की आंधी में बिखर जाओगी 

रंज और दर्द की बस्ती का मैं बाशिन्दा हूँ 
ये तो बस मैं हूँ के इस हाल में भी ज़िन्दा हूँ 
ख़्वाब क्यूँ देखूँ वो कल जिसपे मैं शर्मिन्दा हूँ 
मैं जो शर्मिन्दा हुआ तुम भी तो शरमाओगी 

क्यूं मेरे साथ कोई और परेशान रहे 
मेरी दुनिया है जो वीरान तो वीरान रहे 
ज़िन्दगी का ये सफ़र तुमको तो आसान रहे 
हमसफ़र मुझको बनाओगी तो पछताओगी 

एक मैं क्या अभी आयेंगे दीवाने कितने 
अभी गूंजेगे मुहब्बत के तराने कितने 
ज़िन्दगी तुमको सुनायेगी फ़साने कितने 
क्यूं समझती हो मुझे भूल नही पाओगी

Javed akhtar

Posted by | View Post | View Group

Ek pal ghamo ka dariya ek pal khushi ka dariya

इक पल गमों का दरिया, इक पल खुशी का दरिया

रूकता नहीं कभी भी, ये ज़िन्‍दगी का दरिया

आँखें थीं वो किसी की, या ख़्वाब की ज़ंजीरे
आवाज़ थी किसी की, या रागिनी का दरिया

इस दिल की वादियों में, अब खाक उड़ रही है
बहता यहीं था पहले, इक आशिकी का दरिया

किरनों में हैं ये लहरें, या लहरों में हैं किरनें
दरिया की चाँदनी है, या चाँदनी का दरिया

Javed akhtar

Posted by | View Post | View Group

Bhookh

आँख खुल मेरी गई हो गया मैं फिर ज़िन्दा

पेट के अन्धेरो से ज़हन के धुन्धलको तक 
एक साँप के जैसा रेंगता खयाल आया 
आज तीसरा दिन है 
आज तीसरा दिन है 

एक अजीब खामोशी से भरा हुआ कमरा कैसा खाली-खाली है 
मेज़ जगह पर रखी है कुर्सी जगह पर रखी है फर्श जगह पर रखी है 
अपनी जगह पर ये छत अपनी जगह दीवारे 
मुझसे बेताल्लुक सब, सब मेरे तमाशाई है 
सामने की खिड़्की से तीज़ धूप की किरने आ रही है बिस्तर पर 
चुभ रही है चेहरे में इस कदर नुकीली है 
जैसे रिश्तेदारो के तंज़ मेरी गुर्बत पर 
आँख खुल गई मेरी आज खोखला हूँ मै 
सिर्फ खोल बाकी है 
आज मेरे बिस्तर पर लेटा है मेरा ढाँचा 
अपनी मुर्दा आँखो से देखता है कमरे को एक सर्द सन्नाटा 
आज तीसरा दिन है 
आज तीसरा दिन है 

दोपहर की गर्मी में बेरादा कदमों से एक सड़क पर चलता हूँ 
तंग सी सड़क पर है दौनो सिम पर दुकाने 
खाली-खाली आँखो से हर दुकान का तख्ता 
सिर्फ देख सकता हूँ अब पढ़ नहीं जाता 
लोग आते-जाते है पास से गुज़रते है 
सब है जैसे बेचेहरा 
दूर की सदाए है आ रही है दूर 

Javed akhtar

Posted by | View Post | View Group

Pyas ki kaise laye taab koi

प्‍यास की कैसे लाए ताब कोई

हीं दरिया तो हो सराब कोई


रात बजती थी दूर शहनाई
रोया पीकर बहुत शराब कोई

कौन सा ज़ख्‍म किसने बख्‍शा है
उसका रखे कहाँ हिसाब कोई

फिर मैं सुनने लगा हूँ इस दिल की
आने वाला है फिर अज़ाब कोई

Javed akhtar

Posted by | View Post | View Group

Kyon dare zindagi mein kya hoga

क्‍यों डरें ज़िन्‍दगी में क्‍या होगा

कुछ ना होगा तो तज़रूबा होगा

हँसती आँखों में झाँक कर देखो
कोई आँसू कहीं छुपा होगा

इन दिनों ना-उम्‍मीद सा हूँ मैं
शायद उसने भी ये सुना होगा

देखकर तुमको सोचता हूँ मैं 
क्‍या किसी ने तुम्‍हें छुआ होगा

Javed akhtar

Posted by | View Post | View Group

Aaj maine apna fir sauda kiya

आज मैंने अपना फिर सौदा किया

और फिर मैं दूर से देखा किया

ज़िन्‍दगी भर मेरे काम आए असूल
एक एक करके मैं उन्‍हें बेचा किया

कुछ कमी अपनी वफ़ाओं में भी थी
तुम से क्‍या कहते कि तुमने क्‍या किया

हो गई थी दिल को कुछ उम्‍मीद सी
खैर तुमने जो किया अच्‍छा किया

Javed akhtar

Posted by | View Post | View Group