Dil

जिसे ले गई है अभी हवा वो वरक़ था दिल की किताब का
कहीं आँसुओं से मिटा हुआ कहीं आँसुओं से लिखा हुआ

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Kabhi yu mile koi maslehat

कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न हो
मुझे अपनी कोई ख़बर न हो, तुझे अपना कोई पता न हो

वो फ़िराक़ हो या विसाल हो, तेरी याद महकेगी एक दिन
वो ग़ुलाब बन के खिलेगा क्या, जो चिराग़ बन के जला न हो

कभी धूप दे, कभी बदलियाँ, दिलो-जाँ से दोनों क़ुबूल हैं
मगर उस नगर में न क़ैद कर, जहाँ ज़िन्दगी का हवा न हो

वो हज़ारों बाग़ों का बाग़ हो, तेरी बरक़तों की बहार से
जहाँ कोई शाख़ हरी न हो, जहाँ कोई फूल खिला न हो

तेरे इख़्तियार में क्या नहीं, मुझे इस तरह से नवाज़ दे
यूँ दुआयें मेरी क़ुबूल हों, मेरे दिल में कोई दुआ न हो

कभी हम भी जिस के क़रीब थे, दिलो-जाँ से बढ़कर अज़ीज़ थे
मगर आज ऐसे मिला है वो, कभी पहले जैसे मिला न हो

Bashir badr

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Khushbu

बस गई है मेरे अहसास में ये कैसी महक
कोई ख़ुशबू मैं लगाऊँ तेरी ख़ुशबू आए

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Raat aankho me dhali

रात आँखों में ढली पलकों पे जुगनूँ आए
हम हवाओं की तरह जाके उसे छू आए

बस गई है मेरे अहसास में ये कैसी महक
कोई ख़ुशबू में लगाऊँ तेरी ख़ुशबू आए

उसने छू कर मुझे पत्थर से फिर इंसान किया
मुद्दतों बाद मेरी आँखों में आँसू आए

मेरा आईना भी अब मेरी तरह पागल है
आईना देखने जाऊँ तो नज़र तू आए

किस तकल्लुफ़ से गले मिलने का मौसम आया
कुछ काग़ज़ के फूल लिए काँच के बाजू आए

उन फ़कीरों को ग़ज़ल अपनी सुनाते रहियो
जिनकी आवाज़ में दरगाहों की ख़ुशबू आए

-Bashir Badr

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Raat aankho me dhali

रात आँखों में ढली पलकों पे जुगनूँ आए
हम हवाओं की तरह जाके उसे छू आए

बस गई है मेरे अहसास में ये कैसी महक
कोई ख़ुशबू में लगाऊँ तेरी ख़ुशबू आए

उसने छू कर मुझे पत्थर से फिर इंसान किया
मुद्दतों बाद मेरी आँखों में आँसू आए

मेरा आईना भी अब मेरी तरह पागल है
आईना देखने जाऊँ तो नज़र तू आए

किस तकल्लुफ़ से गले मिलने का मौसम आया
कुछ काग़ज़ के फूल लिए काँच के बाजू आए

उन फ़कीरों को ग़ज़ल अपनी सुनाते रहियो
जिनकी आवाज़ में दरगाहों की ख़ुशबू आए

-Bashir Badr

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Hai ajeeb shahr ki zindagi

है अजीब शहर कि ज़िंदगी, न सफ़र रहा न क़याम है
कहीं कारोबार सी दोपहर, कहीं बदमिज़ाज सी शाम है

कहाँ अब दुआओं कि बरकतें, वो नसीहतें, वो हिदायतें
ये ज़रूरतों का ख़ुलूस है, या मतलबों का सलाम है

यूँ ही रोज़ मिलने कि आरज़ू बड़ी रख रखाव कि गुफ्तगू
ये शराफ़ातें नहीं बे ग़रज़ उसे आपसे कोई काम है

वो दिलों में आग लगायेगा में दिलों कि आग बुझाऊंगा
उसे अपने काम से काम है मुझे अपने काम से काम है

न उदास हो न मलाल कर, किसी बात का न ख्याल कर
कई साल बाद मिले है हम, तिरे नाम आज कि शाम कर

कोई नग्मा धुप के गॉँव सा, कोई नग़मा शाम कि छाँव सा
ज़रा इन परिंदों से पूछना ये कलाम किस का कलाम है

बशीर बद्र

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Hai ajeeb shahr ki zindagi, na safar raha na qayaam hai
Kahin karobar si dophar kahin badmizaj si shaam hai

Kahan ab duaon ki barkatein, wo naseehatein, wo hidayatein
Ye zaroraton ka khuloos hai, ye mataalbon ka salaam hai

Yun hi roz milne ki aarzo badi rakh rakhao ki guftgu
Ye sharaafatein nahin be gharaz use aapse koi kaam hai

Wo dilo mein aag lagaayega mein dilon ki aag bujhaunga
Use apne kaam se kaam hai mujhe apne kaam se kaam hai

Na udaas ho na malaal kar, kisi baat ka na khyal kar
kai saal baad mile hain ham, tire naam aaj ki shaam hai

Koi naghma dhoop key gaon sa koi naghma shaam ki chhaon sa
Zara in parindon se poochhna ye kalaam kis ka kalaam hai

Bashir Badr

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Aansuon se dhuli khushi

आंसुओं से धूलि ख़ुशी कि तरह 
रिश्ते होते है शायरी कि तरह
 
हम खुदा बन के आयेंगे वरना 
हम से मिल जाओ आदमी कि तरह 
 
बर्फ सीने कि जैसे – जैसे गली 
आँख खुलती गयी कली कि तरह 
 
जब  कभी बादलों में घिरता हैं 
चाँद लगता है आदमी कि तरह 
 
किसी रोज़ किसी दरीचे से 
सामने आओ रोशनी कि तरह 
 
सब नज़र  का फरेब है वरना 
कोई होता नहीं किसी कि तरह 
 
ख़ूबसूरत  उदास  ख़ौफ़ज़दा 
वोह भी है बीसवीं सदी कि तरह 
 
जानता हूँ कि एक दिन मुझको 
वो बदल देगा डायरी कि तरह 
 
बशीर बद्र 
 
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Aansuon se dhuli khushi ki tarah
Rishte hote hain shayri ki tarah
 
Ham khuda ban key aayenge warna
Ham se mil jao aadmi ki tarah
 
Barf seene ki jaise jaise gali
Aankh khulti gayi kali ki tarah
 
Jab kabhi badlon me in ghirta hai
Chand lagta hai aadmi ki tarah
 
Kisi rozan kisi dareeche se
Saamne aao roshni ki tarah
 
Sab nazar ka fareb hai warna
Koi hota nahin kisi ki tarah
 
Khubsoorat udaas Khaufzada
Woh bhi hai beeswin sadi ki tarah
 
Janta hun ki eik din mujhko
wo badal dega dayri ki tarah
 
Bashir Badr 

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Khushboo ki tarah

खुशबू कि तरह आया वो तेज़ हवाओं में
मांगा था जिसे हमने दिन रात दुआओं में

तुम छत पे नहीं आये मै घर से नहीं निकला
ये चाँद बहुत भटका सावन कि घटाओं में

इस शहर में एक लड़की बिलकुल है ग़ज़ल जैसी
बिजली सी घटाओं में खुशबू सी हवाओं में

मौसम का इशारा है खुश रहने दो बच्चों को
मासूम मोहब्बत है फूलों कि खताओं में

भगवान् ही भेजेंगे चावल से भरी थाली
मज़लूम परिंदों कि मासूम सभाओं में

दादा बड़े भोले थे सब से यही कहते थे
कुछ ज़हर भी होता है अंग्रेजी दवाओं में

बशीर बद्र

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Khushboo ki tarah aaya wo tez hawaaon mein
Manga tha jise hamne din raat duaon mein

Turn chhat pe nahin aaye main ghar se nahi nikla
Ye chaand bahut bhatka saawan ki ghataaon mein

Is shahr mein ik ladki bilkul hai ghazal jaisi
Bijli si ghataon mein khushboo si hawaon mein

Mausam ka ishaara hai khush rahne do bachchon ko
Masoom mohabbat hai phoolon ki khataon mein

Bhagwaan hi bhejenge chawal se bhari thali
Mazloom parindon ki masoom sabhaon mein

Dada bade bhole the sab se yahi kahte the
Kuchh zahr bhi hota hai angrezi dawaaon mein

Bashir Badr

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