Sarakti jaye hai rukh se nakab

सरकती जाये है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता-आहिस्ता 
निकलता आ रहा है आफ़ताब आहिस्ता-आहिस्ता 

जवाँ होने लगे जब वो तो हम से कर लिया पर्दा 
हया यकलख़त आई और शबाब आहिस्ता-आहिस्ता 

शब-ए-फ़ुर्कत का जागा हूँ फ़रिश्तों अब तो सोने दो 
कभी फ़ुर्सत में कर लेना हिसाब आहिस्ता-आहिस्ता 

सवाल-ए-वस्ल पर उन को अदू का ख़ौफ़ है इतना 
दबे होंठों से देते हैं जवाब आहिस्ता आहिस्ता 

हमारे और तुम्हारे प्यार में बस फ़र्क़ है इतना 
इधर तो जल्दी जल्दी है उधर आहिस्ता आहिस्ता 

वो बेदर्दी से सर काटे ‘अमीर’ और मैं कहूँ उन से 
हुज़ूर आहिस्ता-आहिस्ता जनाब आहिस्ता-आहिस्ता

Amir minai

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Us ki hasrat hai jise dil se mita bhi na sakun

उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी न सकूँ
ढूँढने उस को चला हूँ जिसे पा भी न सकूँ

डाल कर ख़ाक मेरे ख़ून पे क़ातिल ने कहा
कुछ ये मेहंदी नहीं मेरी के मिटा भी न सकूँ

ज़ब्त  कमबख़्त ने और आ के गला घोंटा है
के उसे हाल सुनाऊँ तो सुना भी न सकूँ

उस के पहलू में जो ले जा के सुला दूँ दिल को
नींद ऐसी उसे आए के जगा भी न सकूँ

नक्श-ऐ-पा देख तो लूँ लाख करूँगा सजदे
सर मेरा अर्श नहीं है कि झुका भी न सकूँ

बेवफ़ा लिखते हैं वो अपनी कलम से मुझ को
ये वो किस्मत का लिखा है जो मिटा भी न सकूँ

इस तरह सोये हैं सर रख के मेरे जानों पर
अपनी सोई हुई किस्मत को जगा भी न सकूँ 

Amir minai

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Ahista Ahista

वो बेदर्दी से सर काटे मेरा और मैं कहूँ उनसे
हुज़ूर आहिस्ता आहिस्ता ज़नाब आहिस्ता आहिस्ता

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