गलत कहते है लोग …

गलत कहते है लोग संगत का असर होता है…😢
वो बरसो साथ रही मेरे और बेवफा निकली…💘

#ऋषि की शायरी

गलत कहते है लोग संगत का असर होता है…😢
वो बरसो साथ रही मेरे और बेवफा निकली…💘

#ऋषि की शायरी

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मेरी डायरी के …

मेरी डायरी के पन्ने बोलते बहुत है,
मै राज छुपाता हूँ, ये खोलते बहुत है
.
SHoaiB

मेरी डायरी के पन्ने बोलते बहुत है,
मै राज छुपाता हूँ, ये खोलते बहुत है
.
SHoaiB

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मुझे रुलाने की …

मुझे रुलाने की कोशिश भी मत करना मेरी परवरिश ही दर्द ने की है…

#ऋषि की शायरी

मुझे रुलाने की कोशिश भी मत करना मेरी परवरिश ही दर्द ने की है…

#ऋषि की शायरी

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रिश्ता उस से, इस तरह …

रिश्ता उस से, इस तरह कुछ मेरा बढ़ने लगा..
मैं उसे लिखने लगा , तो वो मुझे पढ़ने लगी…
#keval_______patel

रिश्ता उस से, इस तरह कुछ मेरा बढ़ने लगा..
मैं उसे लिखने लगा , तो वो मुझे पढ़ने लगी…
#keval_______patel

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अपने “दिल” की अदालत …

अपने “दिल” की अदालत में ज़रूर जाएं…
सुना है,वहाँ कभी गलत फैसले नहीं हुआ करते !!
Good_morning
.
SHoaiB

अपने “दिल” की अदालत में ज़रूर जाएं…
सुना है,वहाँ कभी गलत फैसले नहीं हुआ करते !!
Good_morning
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SHoaiB

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शायरों से ताल्लुक …

शायरों से ताल्लुक रखो,तबियत ठीक रहेगी…

ये वो हकीम हैं ,अलफ़ाजो से इलाज करते है…
#keval_______patel

शायरों से ताल्लुक रखो,तबियत ठीक रहेगी…

ये वो हकीम हैं ,अलफ़ाजो से इलाज करते है…
#keval_______patel

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मेरी आँखों के जादू …

मेरी आँखों के जादू से अभी तुम नावाकिफ़ हो हम उसे ज़ीना सिखा देते हे जिसे मरने का शौक़ हो…
#सचिन

मेरी आँखों के जादू से अभी तुम नावाकिफ़ हो हम उसे ज़ीना सिखा देते हे जिसे मरने का शौक़ हो…
#सचिन

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👉किसी की बुराई …

👉किसी की बुराई तलाश करने वाले इंसान की मिसाल उस मक्खी की तरह है जो सारे खूबसूरत जिस्म को छोडकर केवल जख्म पर ही बैठती है…
#शुभप्रभात
#सचिन

👉किसी की बुराई तलाश करने वाले इंसान की मिसाल उस मक्खी की तरह है जो सारे खूबसूरत जिस्म को छोडकर केवल जख्म पर ही बैठती है…
#शुभप्रभात
#सचिन

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लोग हर मोड़ पे रूक …

लोग हर मोड़ पे रूक रूक के संभलते क्यूँ हैं ।
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँ हैं ।।
मोड़ होता है जवानी का संभलने के लिए ।
और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँ हैं ।।
नीँद से मेरा तअाल्लुक ही नहीं बरसों से ।
खाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यूँ हैं
मैं ना जुगनूँ हूँ दीया हूँ ना कोई तारा हूँ ।
रौशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यूँ हैं ।।
.
SHoaiB

लोग हर मोड़ पे रूक रूक के संभलते क्यूँ हैं ।
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँ हैं ।।
मोड़ होता है जवानी का संभलने के लिए ।
और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँ हैं ।।
नीँद से मेरा तअाल्लुक ही नहीं बरसों से ।
खाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यूँ हैं
मैं ना जुगनूँ हूँ दीया हूँ ना कोई तारा हूँ ।
रौशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यूँ हैं ।।
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SHoaiB

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