मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदलकर देख मुझसे…

मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदलकर देख
मुझसे भी बुरे हैं लोग तू घर से निकलकर देख

शराफ़त से मुझे नफ़रत है ये जीने नहीं देती,
कि तुझको तोड़ लेंगे लोग तू फूलों सा खिलकर देख

ज़रुरी तो नहीं जो दिख रहा है सच मेँ वैसा हो
ज़मीं को जानना है ग़र तो बारिश में फिसलकर देख

पता लग जाएगा अपने ही सब बदनाम करते हैं
कभी ऊँचाइयोँ पर तू भी अपना नाम लिखकर देख

अगर मैँ कह नहीं पाया तो क्या चाहा नहीं तुझको
मोहब्बत की सनद चाहे तो मेरे घर पे चलकर देख

तुझे ही सब ज़माने में बुरा कहते हैँ क्यों ‘फ़ैसल’
बिखर जाएगा यूँ ना सोच दीवाने संभलकर देख ।

– सिराज फ़ैसल ख़ान

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आपको इश्क के इज़हार से डर लगता है और हमें…

आपको इश्क के इज़हार से डर लगता है
और हमें आपके इनकार से डर लगता है

मेरे मासूम से बच्चे की आँख में आँसू
ऐ ग़रीबी हमें त्यौहार से डर लगता है

माँ मुझे अपने ही आँचल में छुपाये रखना
ढाल को कब किसी तलवार से डर लगता है

ये ही लूटेगा हमें जाके किसी कोने में
हमको इस काफ़िला सालार से डर लगता है

अब ग़ज़ल में किसी मुफलिस की कहानी कहिये
आँख से, ज़ुल्फ़ से, रुखसार से डर लगता है

ऐ सफीने तेरा अब कौन मुहाफ़िज़ होगा
जब तुझे अपनी ही पतवार से डर लगता है

खुद बना देते हैं नेता इन्हें हम लोग यहाँ
और कहते हैं कि सरकार से डर लगता है

मै नहीं डरता ‘मनु’ अपने किसी दुश्मन से
बस मुझे अपने किसी यार से डर लगता है

#मनु_भारद्वाज

ऐसा नहीं है कि अब तेरी जुस्तजू नहीं रही, बस…

ऐसा नहीं है कि अब तेरी जुस्तजू नहीं रही,
बस टूट-टूट कर बिखरने की हिम्मत नहीं रही

यूं न पढ़िए कहीं कहीं से हमें, हम इंसान हैं,…

यूं न पढ़िए कहीं कहीं से हमें,
हम इंसान हैं, कोई किताब नही..!!

हक़ीक़त रूबरू हो तो अदाकारी नही चलती, ख़ुदा के सामने…

हक़ीक़त रूबरू हो तो अदाकारी नही चलती,
ख़ुदा के सामने बन्दों की मक्कारी नही चलती…
तुम्हारा दबदबा ख़ाली तुम्हारी ज़िंदगी तक है,
किसी की क़ब्र के अन्दर ज़मींदारी नही चलती..!

मोहब्बत की अदालत मे इन्साफ कहा होती है सजा उसी…

मोहब्बत की अदालत मे इन्साफ कहा होती है
सजा उसी को मिलती है जो बेगुनाह होता हैँ।

किताबों में छपते हैं चाहत के किस्से… हकीकत की दुनिया…

किताबों में छपते हैं चाहत के किस्से…
हकीकत की दुनिया में चाहत नही है…

बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बाद #हरिवंश जी की कालजयी…

बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बाद #हरिवंश जी की कालजयी रचना #मधुशाला की संशोधन के साथ नई प्रस्तुति😊

“फुट चूका जब मधु का प्याला, टूट चुकी जब मधुशाला
मयखाने वीरान हुये अब जहाँ छलकती थी हाला~
दिख रहा ग़मगीन क्लब, जो था मय से मतवाला~
मधुशाला को छोड़ लोग अब मन्दिर-मस्जिद जाते हैं,
मन्दिर-मस्जिद मेल कराते, जेल कराती मधुशाला~😂

उदास दिल है मगर मिलता हूँ हर एक से हँसकर,…

उदास दिल है मगर मिलता हूँ हर एक से हँसकर,
यही एक हुनर सीखा है मैंने बहुत कुछ खो देने के बाद..

मेरे दिल से उसकी हर गलती माफ हो जाती है,…

मेरे दिल से उसकी हर गलती माफ हो जाती है,
जब वो मुस्कुरा के पुछती है नाराज हो क्या..