दोस्तो आज हमारे …

दोस्तो आज हमारे एडिटर ऋषि शर्मा का जन्मदिन है। पूरी टीम की तरफ से और पेज के दर्शकों की तरफ से उनको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं ।

दोस्तो आज हमारे एडिटर ऋषि शर्मा का जन्मदिन है। पूरी टीम की तरफ से और पेज के दर्शकों की तरफ से उनको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं ।

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तुझे भूलना भी एक …

तुझे भूलना भी एक तरह की जीत है मेरी……!
इतनी मेहनत तो तुझे पाने के लिए भी नहीं की…!
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SHoaiB

तुझे भूलना भी एक तरह की जीत है मेरी……!
इतनी मेहनत तो तुझे पाने के लिए भी नहीं की…!
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जिसकी कोई गारंटी …

जिसकी कोई गारंटी नहीं वो ज़िन्दगी हैं,
और जिसकी गारंटी है वो है मौत..😎
शुभप्रभात

जिसकी कोई गारंटी नहीं वो ज़िन्दगी हैं,
और जिसकी गारंटी है वो है मौत..😎
शुभप्रभात

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बात ये है कि बातो …

बात ये है कि बातो में अब वो बात नहीं रही..😎

बात ये है कि बातो में अब वो बात नहीं रही..😎

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वो फिर से जिंदगी …

वो फिर से जिंदगी में दस्तक देने लगे है,
दुगनी मोहब्बत से मिलूँ या थोड़े भाव खाऊँ..😎

वो फिर से जिंदगी में दस्तक देने लगे है,
दुगनी मोहब्बत से मिलूँ या थोड़े भाव खाऊँ..😎

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तेरे चेहरे पे आ …

तेरे चेहरे पे आ जाऊँगा एक मुस्कुराहट बनकर..
बस ! अपने लबों से मेरा नाम बुलाकर तो देखो..!!
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SHoaiB

तेरे चेहरे पे आ जाऊँगा एक मुस्कुराहट बनकर..
बस ! अपने लबों से मेरा नाम बुलाकर तो देखो..!!
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कुछ की बातों में भी …

कुछ की बातों में भी दम नहीं होता…
कुछ की खामोशियाँ भी निशान छोड़ जाती हैं…!!
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SHoaiB

कुछ की बातों में भी दम नहीं होता…
कुछ की खामोशियाँ भी निशान छोड़ जाती हैं…!!
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SHoaiB

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जिंदगी की स्क्रीन …

जिंदगी की स्क्रीन जब, लॉ बैटरी दिखाए
और जिसे अपना कह सके उन रिश्तों का चार्जर न मिले
उस वक़्त जो पावर-बैंक बनके आपको बचाए
उसे “दोस्त” कहते है ।
.
SHoaiB

जिंदगी की स्क्रीन जब, लॉ बैटरी दिखाए
और जिसे अपना कह सके उन रिश्तों का चार्जर न मिले
उस वक़्त जो पावर-बैंक बनके आपको बचाए
उसे “दोस्त” कहते है ।
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मौत की निशानियाँ …

मौत की निशानियाँ हों जैसे पेड़ के नीचे
टूटी कुछ पत्तियां हों जैसे पेड़ के नीचे।

फ़िर से तुम आओ न खुल के इस तरह
नटखट गिलहरियां हों जैसे पेड़ के नीचे।

इस शहर में मैं बिल्कुल वैसे ही पड़ा हूँ
आम की गुठलियां हों जैसे पेड़ के नीचे।

लम्बी नहीं है बहुत उम्र रोशनी की यहाँ
जुगनुओं की बस्तियाँ हों जैसे पेड़ के नीचे।

इन दीवारों के बीच मेरा हाल कुछ ऐसा है
मुर्झायी सी कलियाँ हों जैसे पेड़ के नीचे।

अपने भीतर न पूछो कितना बिखर गया
टूटी कुछ टहनियां हों जैसे पेड़ के नीचे।

#नीलाभ

मौत की निशानियाँ हों जैसे पेड़ के नीचे
टूटी कुछ पत्तियां हों जैसे पेड़ के नीचे।

फ़िर से तुम आओ न खुल के इस तरह
नटखट गिलहरियां हों जैसे पेड़ के नीचे।

इस शहर में मैं बिल्कुल वैसे ही पड़ा हूँ
आम की गुठलियां हों जैसे पेड़ के नीचे।

लम्बी नहीं है बहुत उम्र रोशनी की यहाँ
जुगनुओं की बस्तियाँ हों जैसे पेड़ के नीचे।

इन दीवारों के बीच मेरा हाल कुछ ऐसा है
मुर्झायी सी कलियाँ हों जैसे पेड़ के नीचे।

अपने भीतर न पूछो कितना बिखर गया
टूटी कुछ टहनियां हों जैसे पेड़ के नीचे।

#नीलाभ

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हवस मिटानी हो तो …

हवस मिटानी हो तो
कोई जात पात नहीं देखता

बात शादी पर आती है तो
कुण्डली तक मिलाते हैं… ☆Rv

हवस मिटानी हो तो
कोई जात पात नहीं देखता

बात शादी पर आती है तो
कुण्डली तक मिलाते हैं… ☆Rv

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