खामोशियों से मिल …

खामोशियों से मिल रहे है खामोशियों के जवाब,
अब कैसे कहेँ कि उनसे बाते नहीं होती ।
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SHoaiB

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खामोशियों से मिल रहे है खामोशियों के जवाब,
अब कैसे कहेँ कि उनसे बाते नहीं होती ।
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चुप रहना सीख लिया …

चुप रहना सीख लिया है,,
खामोशी अब सुकून देने लगी है ।।
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चुप रहना सीख लिया है,,
खामोशी अब सुकून देने लगी है ।।
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काश तुम समझ पाते …

काश तुम समझ पाते मेरे अनकहे शब्द,
तो यह एहसास ,स्याही और कागज का मौहताज़ ना होता ..😎

काश तुम समझ पाते मेरे अनकहे शब्द,
तो यह एहसास ,स्याही और कागज का मौहताज़ ना होता ..😎

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मर तो एक दिन वैसे भी …

मर तो एक दिन वैसे भी जाना है,
बस तुम मिल जाते तो जी लेते जरा..😎

मर तो एक दिन वैसे भी जाना है,
बस तुम मिल जाते तो जी लेते जरा..😎

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मुकम्मल छोड़ दो …

मुकम्मल छोड़ दो मुझको या फिर मेरे ही हो जाओ..
मुझे अच्छा नहीं लगता तुम्हें पाना, तुम्हें खोना….!!
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SHoaiB

मुकम्मल छोड़ दो मुझको या फिर मेरे ही हो जाओ..
मुझे अच्छा नहीं लगता तुम्हें पाना, तुम्हें खोना….!!
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हम तक ही रह गई वो …

हम तक ही रह गई वो बात
जो तुम तक जानी है ..
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SHoaiB

हम तक ही रह गई वो बात
जो तुम तक जानी है ..
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SHoaiB

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जाने कितने लोग …

जाने कितने लोग मिले हैं इस दुनिया के मेले में..
याद तुम्हारी ही आती है अक्सर बैठ अकेले में…!!
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जाने कितने लोग मिले हैं इस दुनिया के मेले में..
याद तुम्हारी ही आती है अक्सर बैठ अकेले में…!!
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परिंदा क़ैद में …

परिंदा क़ैद में कुल आसमान भूल गया
रिहा तो हो गया लेकिन उड़ान भूल गया

मेरे शिकार को तरकश में तीर लाया मगर
वो मेरी जान का दुश्मन कमान भूल गया

उसे तो याद है सारा जहान मेरे सिवा
मैं उस की याद में सारा जहान भूल गया

#हाशिम_रज़ा_जलालपुरी
#Azhan

परिंदा क़ैद में कुल आसमान भूल गया
रिहा तो हो गया लेकिन उड़ान भूल गया

मेरे शिकार को तरकश में तीर लाया मगर
वो मेरी जान का दुश्मन कमान भूल गया

उसे तो याद है सारा जहान मेरे सिवा
मैं उस की याद में सारा जहान भूल गया

#हाशिम_रज़ा_जलालपुरी
#Azhan

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मेरी निगाह में वो …

मेरी निगाह में वो शख्स आदमी भी नही**
जिसे लगा है ज़माना खुदा बनाने में**
**अभी ना इन्हें परेशां करो मसीहाओं
**मरीज़ उलझे हुए हैं दवा बनाने में
ये चन्द लोग जो बस्ती में सबसे अच्छे हैं***
इन्ही का हाँथ है मुझको बुरा बनाने में*****
***मेरा ज़मीर मेरा ऐतबार बोलता है
***मेरी जुबान से परवरदिगार बोलता है
तेरी ज़ुबान कतरना बहोत ज़रूरी है***
तुझे मरज़ है कि तू बार-बार बोलता है***
***कुछ और काम तो जैसे आता ही नही
#Azhan
***मगर वो झूठ बहोत शानदार बोलता है।।

मेरी निगाह में वो शख्स आदमी भी नही**
जिसे लगा है ज़माना खुदा बनाने में**
**अभी ना इन्हें परेशां करो मसीहाओं
**मरीज़ उलझे हुए हैं दवा बनाने में
ये चन्द लोग जो बस्ती में सबसे अच्छे हैं***
इन्ही का हाँथ है मुझको बुरा बनाने में*****
***मेरा ज़मीर मेरा ऐतबार बोलता है
***मेरी जुबान से परवरदिगार बोलता है
तेरी ज़ुबान कतरना बहोत ज़रूरी है***
तुझे मरज़ है कि तू बार-बार बोलता है***
***कुछ और काम तो जैसे आता ही नही
#Azhan
***मगर वो झूठ बहोत शानदार बोलता है।।

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