Patanga

बेसबब इश्क़ में मरना मुझे मंज़ूर नहीं
शमा तो चाह रही है कि पतंगा हो जाऊँ

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Roshan

अभी तक दिल में रोशन हैं तुम्हारी याद के जुगनू
अभी इस राख में चिन्गारियाँ आराम करती हैं

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Zakhm

थकी-मांदी हुई बेचारियाँ आराम करती हैं
न छेड़ो ज़ख़्म को बीमारियाँ आराम करती हैं

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Nishaan

पिछला निशान जलने का मौजूद था तो फिर
क्यों हमने हाथ जलते अँगीठी पे रख दिया

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Intzaar

आँखों को इंतज़ार की भट्टी पे रख दिया
मैंने दिये को आँधी की मर्ज़ी पे रख दिया

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Muhabbat

अज़ीब हूँ …ना अनपढ़ रहा, ना  ही काबिल हुआ मैं,
खामखाँ ए मोहब्बत तेरे  स्कूल में दाख़िल हुआ मैं..!!

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Jazbaat

आशिक़ी लिखें, दीवानगी लिखें, या
अपनी ख़ामोशी लिखें …
दिल के जज़्बात अब अल्फ़ाज़ नहीं बनते,
आखिर आज क्या लिखें…

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Dard

मेरी हर आह को वाह मिली है यहाँ…..
कौन कहता है दर्द बिकता नहीं है !!

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Mazak

हमें सताने की ज़रूरत क्या थी,
दिल मेरा जलाने की ज़रूरत क्या थी,
इश्क नही था मुझसे तो कह दिया होता,
मजाक मेरा यूँ बनाने की ज़रूरत क्या थी

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Shanshah

रुखी रोटी को भी बाँट कर खाते हुये देखा मैंने,
सड़क किनारे वो भिखारी “शहंशाह” निकला..

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