Mazak

हमें सताने की ज़रूरत क्या थी,
दिल मेरा जलाने की ज़रूरत क्या थी,
इश्क नही था मुझसे तो कह दिया होता,
मजाक मेरा यूँ बनाने की ज़रूरत क्या थी

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Shanshah

रुखी रोटी को भी बाँट कर खाते हुये देखा मैंने,
सड़क किनारे वो भिखारी “शहंशाह” निकला..

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Tankhwah

जरूरतें जिम्मेंदारियां और ख्वाहिशें…….,
यूं तीन हिस्सों में तनख्वाह की तरह बंट जाता हूँ….

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Insaaf

मुझे खुदा के इन्साफ पर उस दिन यकीन हो गया
जब मैंने अमीर और गरीब का एक जैसा कफ़न देखा

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Pareshaan

मुद्दतो बाद आज फिर परेशान हुआ है दिल,
जाने किस हाल में होगा मुझसे रुठने वाला…

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Kitaab

अंग्रेजी की किताब बन गई हो तुम
पसंद तो आती हो पर समझ मे नही

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Hunar

मुझे यकीन है अपने लफ्जो के हुनर पर…
कि लोग मेरा चेहरा भूल सकते है पर शेर नही…

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Sardiya

फिर पलट रही है सर्दियो की सुहानी शामें,
फिर उसकी याद में जलने का ज़माना आ गया

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Zakhm

मेरें जख्मों पर उसने भी मरहम लगाया, ये कहकर…
कि जल्दी से ठीक हो जाओ, अभी तो और भी जख्म देने बाकि है….

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Wajah

“मुझे छोड़कर जाने कि वज़ह तो बताओ
मेँ हर वज़ह बताऊँगा तुम्हेँ चाहने की”…

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