Khuda

सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का
जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है

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Bebaak

बहुत बेबाक आँखों में त’अल्लुक़ टिक नहीं पाता
मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है

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Yaad

कभी उनकी याद आती है कभी उनके ख्व़ाब आते हैं..
मुझे सताने के सलीके तो उन्हें बेहिसाब आते हैं…!!

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Mulakaat

चन्द लम्हों के लिए एक मुलाक़ात रही,
फिर ना वो तू, ना वो मैं, ना वो रात रही।

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Dooriyan

दूरियाँ जब बढी तो गलतफमियाँ भी बढ गयी
फिर तुमने वो भी सुना , जो मैंने कहा ही नही

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Khat

इक ख़त कमीज़ में उसके नाम का क्या रखा,
क़रीब से गुज़रा हर शख्स पूछता है कौन सा इत्र है जनाब।।

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Aaj ke daur me e dost

आज के दौर में ऐ दोस्त ये मंज़र क्यूँ है 
ज़ख़्म हर सर पे हर इक हाथ में पत्थर क्यूँ है 

जब हक़ीक़त है के हर ज़र्रे में तू रहता है 
फिर ज़मीं पर कहीं मस्जिद कहीं मंदिर क्यूँ है 

अपना अंजाम तो मालूम है सब को फिर भी 
अपनी नज़रों में हर इन्सान सिकंदर क्यूँ है

ज़िन्दगी जीने के क़ाबिल ही नहीं अब “फ़ाकिर” 
वर्ना हर आँख में अश्कों का समंदर क्यूँ है

Sudarshan faakir

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Dosti

हमसे पूछो दोस्ती का सिला 
दुश्मनों का भी दिल हिला देगा 

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Tajmahal

ये चमनज़ार ये जमुना का किनारा ये महल 
ये मुनक़्क़श दर-ओ-दीवार, ये महराब ये ताक़ 

इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर 
हम ग़रीबों की मुहब्बत का उड़ाया है मज़ाक़

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Muhabbat

टूटा तलिस्म-ए-अहद-ए-मोहब्बत कुछ इस तरह
फिर आरज़ू की शमा फ़ुरेज़ाँ न कर सके

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