Bekali bekhudi kuchh aaj nahi

बेकली बेख़ुदी कुछ आज नहीं 

एक मुद्दत से वो मिज़ाज नहीं 

दर्द अगर ये है तो मुझे बस है 
अब दवा की कुछ एहतेयाज नहीं 

हम ने अपनी सी की बहुत लेकिन
मरज़-ए-इश्क़ का इलाज नहीं 

शहर-ए-ख़ूबाँ को ख़ूब देखा मीर
जिंस-ए-दिल का कहीं रिवाज नहीं

Mir taqi mir

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Author: admin

I just love Shayri

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