सीमा ढह ही जाती है …

सीमा ढह ही जाती है
नज़र कह ही जाती है।

दुख की उम्र होती है
रात कट ही जाती है।

जमीं जब जायदाद हो
फिर बँट ही जाती है।

लहर की ये नियति है
टूट वो बह ही जाती है।

मर्यादा के भ्रम ख़ातिर
सीता सह ही जाती है।

#नीलाभ

सीमा ढह ही जाती है
नज़र कह ही जाती है।

दुख की उम्र होती है
रात कट ही जाती है।

जमीं जब जायदाद हो
फिर बँट ही जाती है।

लहर की ये नियति है
टूट वो बह ही जाती है।

मर्यादा के भ्रम ख़ातिर
सीता सह ही जाती है।

#नीलाभ

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