बातें करते हो मगर …

बातें करते हो मगर आँखों से नहीं,ये बात गलत है
यारी फ़कत फूलों से काँटों से नहीं,ये बात गलत है।

पुल बन गया तो लाज़िम है सरपट निकल जाआगे
मगर बात करते मल्लाहों से नहीं,ये बात गलत है।

तुम आए और मिले रेस्तराँ में नुक्कड़ पे नहीं
जो तुम मिलते अब यादों से नहीं,ये बात गलत है।

आओ तो गाँव मिलो मुफ़लिसी और टूटी सड़क से
मिलते तुम अब इन घावों से नहीं,ये बात गलत है।

दुबक जाता है ये कर मुलाकात चाँद से छोटी सी
कायर सूरज मिलता तारों से नहीं,ये बात गलत है।

मातम सा छाया रहता है जैसे ये चीज़ बेगानी हो
खुल के मिलते हम लाशों से नहीं,ये बात गलत है।

#नीलाभ

बातें करते हो मगर आँखों से नहीं,ये बात गलत है
यारी फ़कत फूलों से काँटों से नहीं,ये बात गलत है।

पुल बन गया तो लाज़िम है सरपट निकल जाआगे
मगर बात करते मल्लाहों से नहीं,ये बात गलत है।

तुम आए और मिले रेस्तराँ में नुक्कड़ पे नहीं
जो तुम मिलते अब यादों से नहीं,ये बात गलत है।

आओ तो गाँव मिलो मुफ़लिसी और टूटी सड़क से
मिलते तुम अब इन घावों से नहीं,ये बात गलत है।

दुबक जाता है ये कर मुलाकात चाँद से छोटी सी
कायर सूरज मिलता तारों से नहीं,ये बात गलत है।

मातम सा छाया रहता है जैसे ये चीज़ बेगानी हो
खुल के मिलते हम लाशों से नहीं,ये बात गलत है।

#नीलाभ

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