यूँ कभी किसी पे …

यूँ कभी किसी पे गुस्सा आता है
फ़िर सोचता हूँ ये क्या आता है।

कोई ऐसा है कि भूलना भी चाहूँ
दबे पाँव दिल में चला आता है।

तुम लड़ते हो, लड़ते ही रहना
साथ में ऐसे ही मज़ा आता है।

जुबाँ पे हो ताला,आँखें भी बंद
ये चेहरा सब कुछ बता आता है।

क्या क्या गंवाता है गाँव में वो
शहर से जो रोटी कमा आता है।

माँ की आँख जब लग जाती है
पाँव चुपके से वो दबा आता है।

#नीलाभ

यूँ कभी किसी पे गुस्सा आता है
फ़िर सोचता हूँ ये क्या आता है।

कोई ऐसा है कि भूलना भी चाहूँ
दबे पाँव दिल में चला आता है।

तुम लड़ते हो, लड़ते ही रहना
साथ में ऐसे ही मज़ा आता है।

जुबाँ पे हो ताला,आँखें भी बंद
ये चेहरा सब कुछ बता आता है।

क्या क्या गंवाता है गाँव में वो
शहर से जो रोटी कमा आता है।

माँ की आँख जब लग जाती है
पाँव चुपके से वो दबा आता है।

#नीलाभ

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