वो आँखों से डसती है …

वो आँखों से डसती है
रोना आए तो हँसती है।

किरदार और बाकी हैं
सोच ज़रा ये डरती है।

है बाँध आने ही वाला
मद्धम मद्धम बहती है।

उसकी नियति है ऐसी
उम्र से आगे चलती है।

गुलाब है वो,फ़िर क्यूँ
काँटों जैसा खलती है।

दिखता है चूल्हा चौका
क ख ग घ पढ़ती है।

#नीलाभ

वो आँखों से डसती है
रोना आए तो हँसती है।

किरदार और बाकी हैं
सोच ज़रा ये डरती है।

है बाँध आने ही वाला
मद्धम मद्धम बहती है।

उसकी नियति है ऐसी
उम्र से आगे चलती है।

गुलाब है वो,फ़िर क्यूँ
काँटों जैसा खलती है।

दिखता है चूल्हा चौका
क ख ग घ पढ़ती है।

#नीलाभ

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