जो बात है, मेरी …

जो बात है, मेरी तुम्हारी है
क्यूँ उलझी दुनिया सारी है।

झूट कितना मीठा होता है
खा खा के सेहत बिगाड़ी है।

इक लड़की है,नाम वफ़ा है
बहुत दिनों से ही कुँवारी है।

यूँ ही नहीं नचाता है हमें
ये शहर तो इक मदारी है।

मेरा हँसना ,मेरा रोना अब
कुछ और नहीं,दुकानदारी है।

हर शख्स अब इक जेल है
नाम कैदी का , खुद्दारी है।

कोई और नहीं मुखबिर यहाँ
खुद की खुद से गद्दारी है।

रूह मेरा इक कब्र हुआ
इसमें दफन ईमानदारी है।

#नीलाभ

जो बात है, मेरी तुम्हारी है
क्यूँ उलझी दुनिया सारी है।

झूट कितना मीठा होता है
खा खा के सेहत बिगाड़ी है।

इक लड़की है,नाम वफ़ा है
बहुत दिनों से ही कुँवारी है।

यूँ ही नहीं नचाता है हमें
ये शहर तो इक मदारी है।

मेरा हँसना ,मेरा रोना अब
कुछ और नहीं,दुकानदारी है।

हर शख्स अब इक जेल है
नाम कैदी का , खुद्दारी है।

कोई और नहीं मुखबिर यहाँ
खुद की खुद से गद्दारी है।

रूह मेरा इक कब्र हुआ
इसमें दफन ईमानदारी है।

#नीलाभ

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