दोस्त लिखूं, रक़ीब …

दोस्त लिखूं, रक़ीब लिखूं, संगदिल लिखूं या दिलरुबा लिखूं ,,,
सोचता हूँ ख़त में तुम्हें क्या लिखूं ।।

किस्मत लिखूं, ज़िन्दगी लिखूं, खुशनसीबी लिखूं या सज़ा लिखूं ,,,
सोचता हूँ ख़त में तुम्हें क्या लिखूं ।।

आरज़ू लिखू, जुस्तजू लिखूं, वजह लिखूं या ऐवें ही सब बेवजह लिखूं ,,,
सोचता हूँ ख़त में तुम्हें क्या लिखूं ।।

मोहब्बत लिखूं, नाराज़गी लिखूं, वफ़ा लिखूं या बेवफा लिखूं …
सोचता हूँ ख़त में तुम्हें क्या लिखूं ।।
.
SHoaiB

दोस्त लिखूं, रक़ीब लिखूं, संगदिल लिखूं या दिलरुबा लिखूं ,,,
सोचता हूँ ख़त में तुम्हें क्या लिखूं ।।

किस्मत लिखूं, ज़िन्दगी लिखूं, खुशनसीबी लिखूं या सज़ा लिखूं ,,,
सोचता हूँ ख़त में तुम्हें क्या लिखूं ।।

आरज़ू लिखू, जुस्तजू लिखूं, वजह लिखूं या ऐवें ही सब बेवजह लिखूं ,,,
सोचता हूँ ख़त में तुम्हें क्या लिखूं ।।

मोहब्बत लिखूं, नाराज़गी लिखूं, वफ़ा लिखूं या बेवफा लिखूं …
सोचता हूँ ख़त में तुम्हें क्या लिखूं ।।
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SHoaiB

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