हर एक लफ़्ज़ में …

हर एक लफ़्ज़ में सीने का नूर ढाल के रख
कभी कभार तो काग़ज़ पे दिल निकाल के रख !
जो दोस्तों की मोहब्बत से जी नहीं भरता,
तो आस्तीन में दो-चार साँप पाल के रख !
तुझे तो कितनी बहारें सलाम भेजेंगी,
अभी ये फूल सा चेहरा ज़रा सँभाल के रख !
(अंजुम बाराबंकवी)
#Azhan

हर एक लफ़्ज़ में सीने का नूर ढाल के रख
कभी कभार तो काग़ज़ पे दिल निकाल के रख !
जो दोस्तों की मोहब्बत से जी नहीं भरता,
तो आस्तीन में दो-चार साँप पाल के रख !
तुझे तो कितनी बहारें सलाम भेजेंगी,
अभी ये फूल सा चेहरा ज़रा सँभाल के रख !
(अंजुम बाराबंकवी)
#Azhan

Posted by | View Post | View Group