बशीर बद्र साहब …

बशीर बद्र साहब

पत्थर के जिगर वालों, ग़म में वो रवानी है
खुदा राह बना लेगा, बहता हुआ पानी है

फूलों में ग़ज़ल रखना, ये रात की रानी है
इस में तेरी ज़ुल्फ़ों की बे-रब्त कहानी है

इक ज़ेहने परेशां में वो फूल सा चेहरा है
पत्थर की हिफाज़त में शीशे की जवानी है

क्यूँ चांदनी रातों में दरया पे नहाते हो
सोए हुए पानी में क्या आग लगनी है

इस हौसला ए दिल पर हम ने भी कफ़न पहना
हंसकर कोई पूछेगा क्या जान गवानी है

रोने का असर दिल पर रह रह के बदलता है
आंसू कभी शीशा है, आंसू कभी पानी है

ये शबनमी लहजा है, आहिस्ता ग़ज़ल पढ़ना
तितली की कहानी है, फूलों की ज़ुबानी है
#Azhan

बशीर बद्र साहब

पत्थर के जिगर वालों, ग़म में वो रवानी है
खुदा राह बना लेगा, बहता हुआ पानी है

फूलों में ग़ज़ल रखना, ये रात की रानी है
इस में तेरी ज़ुल्फ़ों की बे-रब्त कहानी है

इक ज़ेहने परेशां में वो फूल सा चेहरा है
पत्थर की हिफाज़त में शीशे की जवानी है

क्यूँ चांदनी रातों में दरया पे नहाते हो
सोए हुए पानी में क्या आग लगनी है

इस हौसला ए दिल पर हम ने भी कफ़न पहना
हंसकर कोई पूछेगा क्या जान गवानी है

रोने का असर दिल पर रह रह के बदलता है
आंसू कभी शीशा है, आंसू कभी पानी है

ये शबनमी लहजा है, आहिस्ता ग़ज़ल पढ़ना
तितली की कहानी है, फूलों की ज़ुबानी है
#Azhan

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