#unknown …

#unknown

कमाने जब निकलता हूँ पसीना छूट जाता है
मैं इस शिद्दत से मरता हूँ कि जीना छूट जाता है

सफ़्हे कुछ बीच में कोरे से रह जाते हैं अब मुझसे
मैं जब भी साल लिखता हूँ महीना छूट जाता है

जलाऊँ किस तरह चूल्हा और ईमान भी रक्खूँ
मैं गर रोटी पकड़ता हूँ मदीना छूट जाता है

मुझे अब खौफ रहता मैं जब भी घर पहुँचता हूँ
मैं अपनी माँ का मुँह देखूँ तो पीना छूट जाता है

मुझे रहने दे साहिल पर कहीं अब और न ले जा
सुना है दूर जाने पर सफीना छूट जाता है

Admin #brij

#unknown

कमाने जब निकलता हूँ पसीना छूट जाता है
मैं इस शिद्दत से मरता हूँ कि जीना छूट जाता है

सफ़्हे कुछ बीच में कोरे से रह जाते हैं अब मुझसे
मैं जब भी साल लिखता हूँ महीना छूट जाता है

जलाऊँ किस तरह चूल्हा और ईमान भी रक्खूँ
मैं गर रोटी पकड़ता हूँ मदीना छूट जाता है

मुझे अब खौफ रहता मैं जब भी घर पहुँचता हूँ
मैं अपनी माँ का मुँह देखूँ तो पीना छूट जाता है

मुझे रहने दे साहिल पर कहीं अब और न ले जा
सुना है दूर जाने पर सफीना छूट जाता है

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