हुज़ूर आपका भी …

हुज़ूर आपका भी एहतराम करता चलूँ
इधर से गुज़रा था सोचा सलाम करता चलूँ,

निगाह-ओ-दिल की यही आखरी तमन्ना है
तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में शाम करता चलूँ,

उन्हें ये ज़िद कि मुझे देख कर किसी को न देख
मेरा ये शौक के सबसे कलाम करता चलूँ !

Admin #brij

हुज़ूर आपका भी एहतराम करता चलूँ
इधर से गुज़रा था सोचा सलाम करता चलूँ,

निगाह-ओ-दिल की यही आखरी तमन्ना है
तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में शाम करता चलूँ,

उन्हें ये ज़िद कि मुझे देख कर किसी को न देख
मेरा ये शौक के सबसे कलाम करता चलूँ !

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