चाहत दिलों में हो …

चाहत दिलों में हो तो झलकती जरुर है…!!
खिलती है जब कली तो महकती जरुर है….!!

रखिये हज़ार क़ैद अमानत को इश्क की…
लेकिन ये अश्क बन के छलकती जरुर है..

दामन बचा के लाख कोई मौत से चले…
पाजेब ज़िंदगी की ख़नकती जरुर है..

छुपती नहीं अपने छुपाने से चाहतें
सीने में आग हो तो भड़कती जरुर है..

जाने वो दिल के जख्म है या चाहतों के फूल…
रातों को कोई चीज़ महकती जरुर है..!!

मंसूर ये मिसाल भी है कितनी बेमिसाल…
चिलमन हो या नकाब सरकती जरूर है…!!

चाहत दिलों में हो तो झलकती जरुर है…!!
खिलती है जब कली तो महकती जरुर है….!!

रखिये हज़ार क़ैद अमानत को इश्क की…
लेकिन ये अश्क बन के छलकती जरुर है..

दामन बचा के लाख कोई मौत से चले…
पाजेब ज़िंदगी की ख़नकती जरुर है..

छुपती नहीं अपने छुपाने से चाहतें
सीने में आग हो तो भड़कती जरुर है..

जाने वो दिल के जख्म है या चाहतों के फूल…
रातों को कोई चीज़ महकती जरुर है..!!

मंसूर ये मिसाल भी है कितनी बेमिसाल…
चिलमन हो या नकाब सरकती जरूर है…!!

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