मुझे रहजन से यूं …

मुझे रहजन से यूं खतरा नही था
मेरे अपनो ने कुछ छोडा नही था .

जो मौसम देख कर खुद को बदल ले
हमारे पास वो चेहरा ही नही था .

तरक्की यूँ न कर पाये कभी हम
अमीर -ए -शहर से कोई रिश्ता नही था .

ये सख्ती सिर्फ खुशियों पर ही क्यूँ थी
गमो पर क्यूँ कोई पहरा नही था .

महक बनकर बिखर जाता हवा में
बहारों ने मुझे कभी देखा ही नही था .

विजय कैसे बतायें हम अपनी कीमत
ज़मीर अपना हमने कभी बेचा नही था ….

(विजय तिवारी )
#Azhan

मुझे रहजन से यूं खतरा नही था
मेरे अपनो ने कुछ छोडा नही था .

जो मौसम देख कर खुद को बदल ले
हमारे पास वो चेहरा ही नही था .

तरक्की यूँ न कर पाये कभी हम
अमीर -ए -शहर से कोई रिश्ता नही था .

ये सख्ती सिर्फ खुशियों पर ही क्यूँ थी
गमो पर क्यूँ कोई पहरा नही था .

महक बनकर बिखर जाता हवा में
बहारों ने मुझे कभी देखा ही नही था .

विजय कैसे बतायें हम अपनी कीमत
ज़मीर अपना हमने कभी बेचा नही था ….

(विजय तिवारी )
#Azhan

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