Aapse behad muhabbat hai mujhe

आपसे बेहद मुहब्बत है मुझे

आप क्यों चुप हैं ये हैरत है मुझे

शायरी मेरे लिए आसाँ नहीं
झूठ से वल्लाह नफ़रत है मुझे

रोज़े-रिन्दी है नसीबे-दीगराँ
शायरी की सिर्फ़ क़ूवत है मुझे

नग़मये-योरप से मैं वाक़िफ़ नहीं
देस ही की याद है बस गत मुझे

दे दिया मैंने बिलाशर्त उन को दिल
मिल रहेगी कुछ न कुछ क़ीमत मुझे


Akbar Allahbadi


Posted by | View Post | View Group
Advertisements

Author: admin

I just love Shayri

Leave a Reply