Tamam umr azabo ka silsila to raha

तमाम उम्र अज़ाबों का सिलसिला तो रहा 
ये कम नहीं हमें जीने का हौसला तो रहा 

गुज़र ही आये किसी तरह तेरे दीवाने 
क़दम क़ादम पे कोई सख़्त मरहला तो रहा 

चलो न इश्क़ ही जीता न अक़्ल हार सकी 
तमाम वक़्त मज़े का मुक़ाबला तो रहा 

मैं तेरी ज़ात में गुम हो सका न तू मुझ में 
बहुत क़रीब थे हम फिर भी फ़ासला तो रहा 

ये और बात कि हर छेड़ लाउबाली थी 
तेरी नज़र का दिलों से मुआमला तो रहा 

बहुत हसीं सही वज़ए-एहतियात तेरी 
मेरी हवस को तेरे प्यार से गिला तो रहा

Jaan nissar akhtar

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