Dil qabil e muhabbat e Jana nahi raha

दिल क़ाबिल-ए-मोहब्बत-ए-जानाँ नहीं रहा 

वो वलवला, वो जोश, वो तुग़याँ नहीं रहा

करते हैं अपने ज़ख़्म-ए-जिगर को रफ़ू हम आप 
कुछ भी ख़्याल-ए-जुम्बिश-ए-मिज़गाँ नहीं रहा 

क्या अच्छे हो गए कि भलों से बुरे हुए 
यारों को फ़िक्र-ए-चारा-ओ-दरमाँ नही रहा 

किस काम के रहे जो किसी से रहा न काम 
सर है मगर ग़ुरूर का सामाँ नहीं रहा 

मोमिन ये लाफ़-ए-उलफ़त-ए-तक़वा है क्यों अबस 
दिल्ली में कोई दुश्मन-ए-ईमाँ नहीं रहा 

Momin khan momin

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Author: admin

I just love Shayri

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