Jaan ke sath gaya sab sar o saman apna

जान के साथ गया सब सर-ओ-सामान अपना

दिल से निकला न मगर एक भी अरमान अपना
कुछ इस अंदाज से नाव अपनी डुबो ली हमने

देखते रह गए मुँह सारे ही तूफ़ान अपना
थी बड़ी फ़िक्र कि मौत आएगी हमको कैसी

कर दिया आपने ये काम भी आसान अपना
देखकर जिसको बदल लेती हैं रस्ता ख़ुशियां

दिल ने उस ग़म को बना रक्खा है दरबान अपना
आईने को यूँही है़रत से तकेगा कब तक

अजनबी चेहरों में इक चेहरा तो पहचान अपना
बुतपरस्ती के तरफ़दार न थे हम लेकिन

आपको देखके जाता रहा ईमान अपना
घर रहा घर न बयाबां ही बयाबान रहा

है बयाबान ही घर,घर ही बयाबान अपना
दर्द आसानी से शेरों में कहाँ ढलते हैं

उम्र गुज़री, न मुकम्मल हुआ दीवान अपना

#राजेश_रेड्डी

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Author: admin

I just love Shayri

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