Tera hizr mera naseeb hai tera gham hi meri hayat hai

तेरा हिज्र मेरा नसीब है तेरा ग़म ही मेरी हयात है 
मुझे तेरी दूरी का ग़म हो क्यों तू कहीं भी हो मेरे साथ है

मेरे वास्ते तेरे नाम पर कोई हर्फ़ आये नहीं नहीं 
मुझे ख़ौफ़-ए-दुनिया नहीं मगर मेरे रू-ब-रू तेरी ज़ात है

तेरा वस्ल ऐ मेरी दिलरुबा नहीं मेरी किस्मत तो क्या हुआ 
मेरी महजबीं यही कम है क्या तेरी हसरतों का तो साथ है

तेरा इश्क़ मुझ पे है मेहरबाँ मेरे दिल को हासिल है दो जहाँ 
मेरी जान-ए-जाँ इसी बात पर मेरी जान जाये तो बात है

Nida Fazli

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Author: admin

I just love Shayri

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