ये तेरी वफ़ा थी तूने …

ये तेरी वफ़ा थी तूने मुझ से निभाया
ये मेरी वफ़ा थी मैंने खुद से निभाया।

वो गृहस्थ देखो क्या क्या निभाता है
ऐ पुजारी तूने महज़ बुत से निभाया।

दो आँसू हिला देते हैं रिश्ते कितने
इक नदी है जिसने है पुल से निभाया।

न होने दी सीधी जोर कितना भी लगा
कुत्ते ने देखो अपनी दुम से निभाया।

#नीलाभ

ये तेरी वफ़ा थी तूने मुझ से निभाया
ये मेरी वफ़ा थी मैंने खुद से निभाया।

वो गृहस्थ देखो क्या क्या निभाता है
ऐ पुजारी तूने महज़ बुत से निभाया।

दो आँसू हिला देते हैं रिश्ते कितने
इक नदी है जिसने है पुल से निभाया।

न होने दी सीधी जोर कितना भी लगा
कुत्ते ने देखो अपनी दुम से निभाया।

#नीलाभ

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एक निवेदन है आप सब …

एक निवेदन है आप सब से कृप्या इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे । ये कोई कहानी कविता शायरी नहीं इस समाज कि हक़ीक़त है। आज किसी और कि बहन के साथ हुआ कल किसी और के साथ होगा ।

एक निवेदन है आप सब से कृप्या इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे । ये कोई कहानी कविता शायरी नहीं इस समाज कि हक़ीक़त है। आज किसी और कि बहन के साथ हुआ कल किसी और के साथ होगा ।

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गाँव में ख़्वाहिश …

गाँव में ख़्वाहिश की झोली अधूरी रहती है
सबके हिस्से में धूप लेकिन पूरी रहती है।

बहुत ज़ियादा होता है कुछ रिश्तों में जुनूँ
बँध जाऊँ तो खुद से लेकिन दूरी रहती है।

जो कुछ न दे पाए तो माँ दुलार ही देती है
एक बाप की न पूछो क्या मज़बूरी रहती है।

#नीलाभ

गाँव में ख़्वाहिश की झोली अधूरी रहती है
सबके हिस्से में धूप लेकिन पूरी रहती है।

बहुत ज़ियादा होता है कुछ रिश्तों में जुनूँ
बँध जाऊँ तो खुद से लेकिन दूरी रहती है।

जो कुछ न दे पाए तो माँ दुलार ही देती है
एक बाप की न पूछो क्या मज़बूरी रहती है।

#नीलाभ

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तुझे याद है ,मैं …

तुझे याद है ,मैं कहाँ गिरा था
मुझे याद है ,मैं वहीं उठा था।

अभी भी खाता हूँ सूखी रोटी
घर में जो मैं सबसे बड़ा था।

आज दफन किया वो रिश्ता
जिसके लिए खुद से लड़ा था।

महफ़िल को निभा जब लौटा
कमरे में तनहा मैं पड़ा था।

बुढ़ापे में जिल्लत थी झेली
फूलों से अब चित्र सजा था।

#नीलाभ

तुझे याद है ,मैं कहाँ गिरा था
मुझे याद है ,मैं वहीं उठा था।

अभी भी खाता हूँ सूखी रोटी
घर में जो मैं सबसे बड़ा था।

आज दफन किया वो रिश्ता
जिसके लिए खुद से लड़ा था।

महफ़िल को निभा जब लौटा
कमरे में तनहा मैं पड़ा था।

बुढ़ापे में जिल्लत थी झेली
फूलों से अब चित्र सजा था।

#नीलाभ

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शायराना सी हैं …

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हम से पुछे ना अब …

हम से पुछे ना अब खैरियत कोई,
दिल को चुभती है ये फिकर कि बातें..😎

हम से पुछे ना अब खैरियत कोई,
दिल को चुभती है ये फिकर कि बातें..😎

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कौन कहता है वक़्त …

कौन कहता है वक़्त मरता नही साहब,
हमने सालो को खत्म होते देखा है दिसंबर में..😎

कौन कहता है वक़्त मरता नही साहब,
हमने सालो को खत्म होते देखा है दिसंबर में..😎

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जिंदगी का अब तो यही …

जिंदगी का अब तो यही मानी हो गया
पानी खून हो गया ,खून पानी हो गया।

शान शौकत की कीमत ऐसे है चुकायी
हरम में बंद राजा की वो रानी हो गया।

मुझसे रुपया लूट चंद सिक्के दे दिए
शहर का वो सबसे बड़ा दानी हो गया।

इक जवानी बिकी तो किताबें आयीं थीं
बेटा वो पढ़ बाप से बड़ा ज्ञानी हो गया।

#नीलाभ

जिंदगी का अब तो यही मानी हो गया
पानी खून हो गया ,खून पानी हो गया।

शान शौकत की कीमत ऐसे है चुकायी
हरम में बंद राजा की वो रानी हो गया।

मुझसे रुपया लूट चंद सिक्के दे दिए
शहर का वो सबसे बड़ा दानी हो गया।

इक जवानी बिकी तो किताबें आयीं थीं
बेटा वो पढ़ बाप से बड़ा ज्ञानी हो गया।

#नीलाभ

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आनंद के पर्वत …

आनंद के पर्वत
को जीतने के बाद
उसकी चोटी पे
बन सूरज
जितनी देर तक
स्नेह की धूप
बरसाते हो तुम
उस दिन
प्रेम की
उतनी ही
उम्र होती है।

#नीलाभ

आनंद के पर्वत
को जीतने के बाद
उसकी चोटी पे
बन सूरज
जितनी देर तक
स्नेह की धूप
बरसाते हो तुम
उस दिन
प्रेम की
उतनी ही
उम्र होती है।

#नीलाभ

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जो लोग दूसरो के …

जो लोग दूसरो के आँखों मे आँसू देते हैं वो ये क्यों भूल जाते हैं..

की उनके पास भी दो आँखे है..!!

#ऋषि✍

जो लोग दूसरो के आँखों मे आँसू देते हैं वो ये क्यों भूल जाते हैं..

की उनके पास भी दो आँखे है..!!

#ऋषि✍

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